आयुष मंत्रालय ने गिलोय के उपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की

नई दिल्ली (New Delhi) . पोस्ट कोविड प्रभाव के रूप में सामने आ रहे मामलों के बाद अब आयुष मंत्रालय ने गिलोय यानि गुडुची के उपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की है. मंत्रालय का कहना है कि गुडुची उपयोग के लिहाज से बेहतर है लेकिन उसके धोखे में उसके जैसे उत्पादों का उपयोग शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है.आयुष मंत्रालय की ओर से अब गुडुची (टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया) के उपयोग को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ध्यान दिया गया है.

मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि गुडुची के समान दिखने वाले पौधे जैसे टिनोस्पोरा क्रिस्पा आदि काफी हानिकारक हो सकते हैं. गुडुची एक लोकप्रिय जड़ी बूटी है, जिसे गिलोय के नाम से जाना जाता है और आयुष प्रणालियों में लंबे समय से चिकित्सा के लिए इसका उपयोग किया जा रहा है लेकिन अगर इसके बजाय किसी और उत्पाद का उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है. इसके हेपाटो-सुरक्षात्मक गुण भी अच्छी तरह से स्थापित हैं. गिलोय अपने विशाल चिकित्सीय अनुप्रयोगों के लिए जाना जाता है और इसके इस्तेमाल को विभिन्न लागू प्रावधानों के अनुसार नियमित किया जाता है. हालांकि कोविड के डर के चलते इसके जैसे उत्पादों का प्रयोग भी सामने आ रहा है. मंत्रालय का कहना है कि यह देखा गया है कि टिनोस्पोरा की विभिन्न प्रजातियां उपलब्ध हैं लेकिन केवल टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया का उपयोग चिकित्सा विज्ञान में किया जाना चाहिए. इसकी समतुल्य प्रजातियों के गुणों और रूपों में काफी अंतर है. जिसे पहचानना जरूरी है. आयुष मंत्रालय का कहना है कि गुडुची एक सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक दवा है हालांकि एक योग्य, पंजीकृत आयुष चिकित्सक के परामर्श लेने के बाद ही इसके उपयोग की सलाह दी जाती है.

मंत्रालय का कहना है कि आयुष के पास फार्माकोविजिलेंस (आयुष दवाओं से संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं की जानकारी देने के लिए) की एक अच्छी तरह से स्थापित प्रणाली है, जिसका नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है. अगर आयुष दवाओं के सेवन के बाद कोई संदिग्ध प्रतिकूल घटना होती है तो इसकी सूचना आयुष चिकित्सक के माध्यम से नजदीकी फार्माकोविजिलेंस सेंटर को दी जा सकती है. इसके अलावा यह सलाह दी जाती है कि आयुष दवा और उपचार केवल एक पंजीकृत आयुष चिकित्सक की देखरेख में एवं परामर्श से ही लें. बता दें ‎कि कोरोना महामारी (Epidemic) के बाद से ही देश में गिलोय के उत्पादों का उपयोग बड़ी मात्रा में किया जा रहा है. कोरोना से बचाव के लिए लोग अभी भी गिलोय का रस, गिलोय की बटी, गिलोय का काढ़ा आदि पी रहे हैं.

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