
कोलकाता, 13 जून . पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को पिछले साल 14 दिसंबर को हुए लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर’ इवेंट से जुड़े कथित कुप्रबंधन और वित्तीय गड़बड़ियों के सिलसिले में Police ने एक बार फिर नोटिस भेजा है.
Police अधिकारियों के मुताबिक, “बिधाननगर दक्षिण Police स्टेशन ने Saturday को एक नया नोटिस जारी किया है जिसमें बिस्वास को समन मिलने के 48 घंटे के अंदर पेश होने का आदेश दिया गया है. इस मामले में पूर्व मंत्री को दिया गया यह तीसरा नोटिस है. Police के इस कदम के बाद अरूप बिस्वास कथित तौर पर छिप गए हैं.”
Police सूत्रों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता बिस्वास ने पूर्व में भेजे गए नोटिस के बाद जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए हैं. अब हमें नए नोटिस पर उनके जवाब का इंतजार है.
यह मामला 17 मई को मेसी के ‘गोट इंडिया टूर’ के मुख्य आयोजक सतद्रु दत्ता की शिकायत से शुरू हुआ है. बिधाननगर दक्षिण Police स्टेशन में दर्ज अपनी First Information Report में, दत्ता ने बिस्वास पर कथित टिकट ब्लैक-मार्केटिंग, जबरन वसूली, धमकी, धोखाधड़ी और इवेंट की सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया. शिकायत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के कई नियमों के तहत दर्ज की गई थी.
First Information Report के बाद, Police ने शुरू में बिस्वास को 4 जून को जांचकर्ताओं के सामने पेश होने का निर्देश दिया. हालांकि, तय तारीख से पहले, पूर्व मंत्री ने Police को बताया कि उन्हें सेहत से जुड़ी दिक्कतें हैं और वे कम से कम दो सप्ताह तक पेश नहीं हो पाएंगे.
जांचकर्ता इस बात से सहमत नहीं हुए और बाद में उन्हें 8 जून को सुबह 11 बजे तक Police स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया. डेडलाइन से एक दिन पहले, Police ने उनके दक्षिण कोलकाता वाले घर पर नोटिस चिपका दिया, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने अपनी बीमारी के दावे को साबित करने के लिए कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी है. निर्देश के बावजूद, बिस्वास 8 जून को जांचकर्ताओं के सामने पेश नहीं हुए. Police सूत्रों ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने Police को उनकी गैरमौजूदगी के बारे में आधिकारिक तौर पर बताया.
इस बीच, बिस्वास ने मामले में अग्रिम जमानत के लिए बारासात अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई. बाद में उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें जबरदस्ती की कार्रवाई से सुरक्षा मांगी गई. हाई कोर्ट ने उन्हें शर्तों के साथ राहत दी और Police को उनकी पेशी के लिए 48 घंटे पहले नोटिस देने का निर्देश दिया.
अदालत ने जांच को बिना किसी रुकावट के जारी रखने की इजाजत दी, जबकि Police को बिना सही प्रक्रिया का पालन किए गिरफ्तारी समेत जबरदस्ती के कदम उठाने से रोक दिया. कोर्ट ने बिस्वास को बिना पहले से इजाजत के पश्चिम बंगाल छोड़ने पर भी रोक लगा दी है. अब तीसरा समन जारी होने के साथ पूर्व मंत्री के अगले कदम का इंतजार है.
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पीएके
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