
New Delhi/उलानबटार, 27 मई . India Government के संस्कृति मंत्रालय, इंटरनेशनल बौद्ध कन्फेडरेशन (आईबीसी) और New Delhi के नेशनल म्यूजियम के सहयोग से भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेषों की एक विशेष प्रदर्शनी मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित की जाएगी. यह आयोजन 1 से 10 जून तक गंडेन मठ में होगा.
यह पहल India और मंगोलिया के बीच गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों की कड़ी है. इससे पहले जून 2022 में भगवान बुद्ध के कपिलवस्तु से जुड़े चार पवित्र अवशेषों को India से मंगोलिया ले जाया गया था. करीब 29 साल बाद 11 दिनों के लिए गंदन्तेगछेलिंग मठ में प्रदर्शित किया गया था. इन अवशेषों को महात्मा बुद्ध के दंत अवशेष के साथ प्रदर्शित किया गया था.
उस समय ये अवशेष भारतीय वायुसेना के सी-17 विमान से विशेष सुरक्षा के साथ भेजे गए थे और एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ गया था.
Prime Minister Narendra Modi ने 2025 में खुरेलसुख उखना के चार दिवसीय India दौरे के दौरान घोषणा की थी कि अर्हत सारिपुत्र और अर्हत मौद्गल्या-यन के अवशेष भी मंगोलिया भेजे जाएंगे. उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने बौद्ध संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम बताया था.
14 अक्टूबर 2025 को संयुक्त संबोधन में Prime Minister ने यह भी कहा कि India और मंगोलिया के रिश्ते केवल राजनयिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आध्यात्मिक और आत्मीय बंधन पर आधारित हैं.
उन्होंने कहा, “हमारे संबंधों की असली गहराई हमारे पीपल-टू-पीपल-टाइज में दिखाई देती है. सदियों से दोनों देश बौद्ध धर्म के सूत्र में बंधे हैं. इस वजह से हमें ‘स्पिरिचुअल सिबलिंग’ कहा जाता है. मुझे यह बताते हुए खुशी है कि अगले वर्ष भगवान बुद्ध के दो महान शिष्यों सारिपुत्र और मौद्गल्या-यन के पवित्र अवशेष India से मंगोलिया भेजे जाएंगे. यह कदम दोनों देशों के बीच बौद्धिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करेगा.”
बौद्ध परंपरा में सारिपुत्र और मौद्गल्या-यन को भगवान बुद्ध के सबसे प्रमुख शिष्यों में माना जाता है, जिनका योगदान बौद्ध धर्म के ज्ञान, शिक्षाओं और साधना के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. सारिपुत्र को विशेष रूप से गहन ज्ञान और विश्लेषणात्मक समझ के लिए जाना जाता है, जबकि मौद्गल्या-यन को आध्यात्मिक शक्तियों और साधना में सिद्ध माना जाता है.
माना जाता है कि India और मंगोलिया के बीच यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रिश्तों का प्रतीक भी है, जो बौद्ध धम्म के माध्यम से सदियों से जुड़ा हुआ है.
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केआर/
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