सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा मिलने पर चीन में भारतीय दूतावास का संदेश, ‘हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण’

बीजिंग, 26 जुलाई . उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है. चीन में भारतीय दूतावास ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और इसे हर भारतीय के लिए खुशी का पल बताया.

भारतीय दूतावास ने एक्स पर लिखा, “हर भारतीय के लिए गर्व का पल! सारनाथ, जहां भगवान बुद्ध ने पहली बार धर्म चक्र चलाया था, उसे यूनेस्को वर्स्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया है. यह India की गहरी सभ्यता और आध्यात्मिक विरासत, और सारनाथ के ज्ञान, करुणा और सद्भाव के हमेशा रहने वाले संदेश की एक बड़ी पहचान है, जो दुनिया भर में गूंजता रहता है.”

इससे पहले यूनेस्को ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि India के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ को आधिकारिक रूप से विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है.

उपPresident सीपी राधाकृष्णन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सारनाथ का यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है.

उन्होंने कहा कि सारनाथ शांति, ज्ञान और करुणा का स्थायी प्रतीक है तथा यह India की कालातीत आध्यात्मिक और दार्शनिक विरासत का प्रतिनिधित्व करता है. उपPresident ने कहा कि यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि India की प्राचीन सभ्यता और उसके आध्यात्मिक विचार आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और पीढ़ियों तक अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं.

वहीं, Prime Minister Narendra Modi ने यूनेस्को की घोषणा पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश स्थित सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध रहा है और उनके ज्ञान, करुणा तथा सद्भाव का कालजयी संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है.

Prime Minister ने कहा कि यह सम्मान India की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस मान्यता से दुनिया भर के अधिक लोग सारनाथ आएंगे और भगवान बुद्ध के आदर्शों एवं शिक्षाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे.

सारनाथ बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश यहीं दिया था, जिसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है. यही कारण है कि सारनाथ दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आस्था और अध्ययन का प्रमुख केंद्र रहा है.

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी. साथ ही अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा मिलने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को नई गति मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

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