
शिलांग, 6 अगस्त . विपक्षी पार्टी ‘वॉयस ऑफ द पीपल्स पार्टी’ (वीपीपी) ने Thursday को मेघालय सचिवालय तक एक बड़ा मार्च निकाला. पार्टी ने 10 अहम जन-मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की.
वीपीपी ने इस मार्च को राज्य के हालिया Political इतिहास में लोगों के सबसे बड़े जमावड़े में से एक बताया था और दावा किया था कि इसमें 1 लाख से ज्यादा लोग शामिल होंगे. हालांकि, रैली में काफी लोग जुटे, लेकिन संख्या पार्टी के अनुमान से कम रही.
वीपीपी के मुताबिक, यह प्रदर्शन मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) Government पर कई मुद्दों को लेकर दबाव बनाने के लिए किया गया था. इन मुद्दों में ‘लुम पोंगडेंग’ प्रोजेक्ट को लागू करना और ‘व्हाइट पेपर’ जारी करना, डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी (डीएससी), मेघालय पब्लिक सर्विस कमीशन (एमपीएससी) और दूसरी एजेंसियों के जरिए हुई भर्तियों की स्वतंत्र समीक्षा, मूल निवासियों के अधिकारों के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय, माइग्रेशन को रेगुलेट करने और मूल निवासियों की पहचान करने के लिए कानून बनाना, स्ट्रीट वेंडर्स के अधिकारों को बहाल करना और पारंपरिक गांव के मुखियाओं और उनकी परिषदों को मान्यता देना शामिल है.
पार्टी ने कोक और सीमेंट इंडस्ट्रीज के लिए सख्त नियम बनाने, नदियों और दूसरे जल स्रोतों की सुरक्षा, अंधाधुंध रेत और पत्थर की माइनिंग और जल स्रोतों में कचरा फेंकने पर रोक लगाने, और अवैध कोयला माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन और इस सेक्टर में चल रहे कथित सिंडिकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है.
यह विरोध प्रदर्शन Political रूप से अहम है क्योंकि यह मेघालय विधानसभा के ऑटम सेशन (24 से 28 अगस्त) से तीन हफ्ते से भी कम समय पहले हुआ है. इस सेशन में विपक्ष को बहस, सवालों और प्रस्तावों के जरिए इन मुद्दों को उठाने का मौका मिलेगा.
मार्च से पहले, Chief Minister कॉनराड के. संगमा ने सवाल किया कि जब विधानसभा का सेशन होने वाला है तो सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने की क्या जरूरत है. उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए जन मुद्दों को उठाने का सही लोकतांत्रिक मंच विधानसभा ही है और दोहराया कि Government बातचीत के लिए तैयार है.
विरोध प्रदर्शन के दौरान वीपीपी के लिए एक शर्मनाक पल भी आया. पार्टी नेता और एमडीसी पॉवेल सोखलेट विरोधी Political पार्टियों के खिलाफ नारे लगवा रहे थे, तभी उन्होंने गलती से वीपीपी को भी उन पार्टियों में शामिल कर लिया जिनकी निंदा करने के लिए वे भीड़ से कह रहे थे.
भीड़ ने बिना किसी हिचकिचाहट के उन नारों को दोहराया. इससे पता चला कि कई लोगों को विरोध प्रदर्शन के मकसद के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी. इन घटनाओं ने मेघालय में बड़े पैमाने पर लोगों को एकजुट करने की असरदारता और क्या इसमें शामिल लोगों को उठाए जा रहे मुद्दों के बारे में ठीक से जानकारी दी गई थी, इस पर Political बहस छेड़ दी है.
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एएसएच/डीकेपी
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