लोगों और मवेशियों के आहार के लिए खाद्यान्न की मांग को पूरा करना हमेशा सरकार की पहली प्राथमिकता होगी


नई दिल्ली (New Delhi) . मीडिया (Media) के एक हिस्से में, महत्वाकांक्षी इथेनॉल योजना को देश में खाद्य सुरक्षा पर संकट से जोड़ते हुए कुछ रिपोर्ट आई थीं. यह स्पष्ट किया जाता है कि ये रिपोर्ट निराधार, दुर्भावनापूर्ण और तथ्यों से परे हैं. यह समझना बहुत जरूरी है कि भारत जैसे युवा देश के लिए, जहां भोजन की जरूरतों को पूरा करना सर्वोपरि है, वहीं हर तरह से ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करना भी महत्वपूर्ण है. इस प्रकार, बदले हुए परिदृश्य में “ईंधन के साथ आहार” होना चाहिए न कि “आहार बनाम ईंधन”.

सबसे तेजी से बढ़ते अपने देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और कच्चे तेल के आयात पर लगातार बढ़ती निर्भरता हमारी भविष्य की विकास क्षमता को काफी हद तक बाधित कर सकती है. एथनॉल, बायोडीजल, कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) जैसे घरेलू ईंधन के विकास में ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने की क्षमता है. पिछले छह वर्षों के दौरान, इस सरकार ने इथेनॉल उत्पादन के लिए अतिरिक्त गन्ना आधारित कच्चे माल (जैसे गन्ने का रस, चीनी, चीनी सिरप) के रूपांतरण की अनुमति देकर तरलता की कमी वाले चीनी उद्योग में 35,000 करोड़ रुपये का सफलतापूर्वक निवेश किया है. इससे निश्चित रूप से गन्ना किसानों के बकाया के जल्द निपटान में मदद मिली है और उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है. मौजूदा सीज़न के लिए, यह उम्मीद की जाती है कि अकेले इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के माध्यम से 20,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश किया जाएगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में विकास को बढ़ावा देगा, जो चुनौतीपूर्ण कोरोना काल में सबसे अनुकूल क्षेत्र है. गन्ना सीजन 2021-22 के लिए चीनी का उत्पादन लगभग 340 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो 90 लाख मीट्रिक टन के शुरुआती भंडार से अधिक होने के साथ-साथ कुल मिलाकर 260 लाख मीट्रिक टन की घरेलू खपत से बहुत अधिक है. इसमें से 35 लाख मीट्रिक टन चीनी की अतिरिक्त मात्रा को इथेनॉल में बदलने का प्रस्ताव है. यह नहीं भूलना चाहिए कि ये इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी की अतिरिक्त मात्रा है, जिसे अन्य देशों को रियायती दर पर निर्यात करना होगा या यदि बाजार में जारी किया जाता है तो चीनी की कीमतें उत्पादन लागत से काफी कम हो जाती हैं तथा इससे पूरी तरह से उथल-पुथल हो जाता है. इसी तरह, अकेले भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास (05.10.2021 तक) चावल का स्टॉक 202 लाख मीट्रिक टन है, जो देश की बफर स्टॉक की आवश्यकता से बहुत अधिक है.

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