
बरेली, 5 जुलाई . ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने Sunday को जम्मू-कश्मीर Government की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘समग्र शिक्षा योजना’ के तहत खरीदी गई पाठ्यपुस्तकों में अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों का महिमामंडन किया गया है.
शहाबुद्दीन रजवी ने ऐसी किताबों पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की और चेतावनी दी कि छात्रों को ऐसी सामग्री पढ़ाने से वे कट्टरपंथ की ओर बढ़ सकते हैं.
उनकी यह टिप्पणी जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम (जेकेपीएफ) नामक सामाजिक और गैरPolitical संगठन के उस आरोप के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि ‘समग्र शिक्षा योजना’ के तहत खरीदी गई एक पाठ्यपुस्तक में अलगाववादी हस्तियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली सामग्री है, जिसमें जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के संस्थापक मकबूल भट भी शामिल हैं.
रजवी ने से बात करते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर के स्कूलों के पाठ्यक्रम में ऐसी किताबें शामिल हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों के बारे में सिखाती हैं और उनके बारे में विस्तार से बताती हैं. यह बेहद अफसोसजनक है कि पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए जिम्मेदार लोगों ने आतंकवादियों के नाम शामिल करना और बच्चों को उनके बारे में पढ़ाना सही समझा.”
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि अगर युवा पीढ़ी को ऐसी सामग्री पढ़ाई जाती है जो आतंकवाद का महिमामंडन करती है, तो वे ‘निश्चित रूप से कट्टरपंथी बन जाएंगे.’ उन्होंने अधिकारियों से शांति और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए स्कूल पाठ्यक्रम में सूफीवाद और सूफी संतों के योगदान का उल्लेख शामिल करने का भी आग्रह किया.
उन्होंने कहा, “यह तथ्य कि ऐसा कुछ समय से चल रहा है, प्रशासन की ओर से एक बड़ी विफलता को दर्शाता है. अगर नई पीढ़ी को इसी तरह शिक्षित किया जाता रहा, तो कोई भी उनके मन और दिल की स्थिति की कल्पना कर सकता है. वे निश्चित रूप से कट्टरपंथी बन जाएंगे.”
पाठ्यक्रम में पूरी तरह से बदलाव की मांग करते हुए रजवी ने कहा, “इसलिए, मौजूदा किताबों पर प्रतिबंध लगाना और नई किताबें तैयार करना आवश्यक है जिनमें सूफीवाद का उल्लेख हो, विशेष रूप से कश्मीर के सूफियों, उनके योगदान और उनकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला जाए. इससे लोगों के दिलों में देशभक्ति और देश के प्रति प्रेम की भावना पैदा करने में मदद मिलेगी. साथ ही, आतंकवाद को खत्म करने का संकल्प और आतंकवादियों के प्रति नफरत की भावना भी पैदा होगी.”
उन्होंने अधिकारियों से पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच करने और मौजूदा पाठ्यपुस्तकों को संशोधित संस्करणों से बदलने का भी आग्रह किया. उन्होंने कहा, “मैं जम्मू-कश्मीर Government से यह भी अपील करूंगा कि वे इन किताबों के लेखकों की जांच करें, मौजूदा किताबों की जगह सूफीवाद पर आधारित नई किताबें लाएं और उन्हें स्कूलों में बच्चों के लिए लागू करें. आतंकवाद एक ऐसी बुराई है जिसे किसी खास धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.”
–
एससीएच/पीएम
Skip to content