मौलाना साजिद कासमी ने असम सरकार के फैसले का किया समर्थन, कहा-स्वागतयोग्य कदम

शामली, 18 अगस्त . असम Government के दो नए फैसलों पर जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने समर्थन जताया है. पहला फैसला माता-पिता की देखभाल न करने वाले कर्मचारियों के वेतन से कटौती को लेकर है और दूसरा बिना तलाक दूसरी शादी करने पर वेतन काटने को लेकर है.

असम Government ने नियम लागू किया है कि जो सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करेंगे, उनके वेतन से 10 प्रतिशत राशि काटकर सीधे उनके माता-पिता के खाते में भेजी जाएगी.

इस पर मौलाना साजिद कासमी ने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा कदम है. अब तक हमने देखा है कि कई लोग अपने माता-पिता को बुढ़ापे में ओल्ड-एज होम यानी वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं. उनके पास कोई रिश्तेदार या वारिस नहीं बचता. जब आखिरी वक्त आता है तो अंतिम संस्कार में भी बच्चे ज्यादातर शरीक नहीं होते हैं. यह बेअदबी का मामला है.”

मौलाना का मानना है कि इस फैसले से ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी और मां-बाप का अच्छे से ख्याल रखा जाएगा. असम Government ने यह भी ऐलान किया है कि जो कर्मचारी अपनी पहली पत्नी को कानूनी रूप से तलाक दिए बिना दूसरी शादी करेंगे, उनके वेतन से 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी. इस पर मौलाना साजिद कासमी ने कहा, “सनातन धर्म में, अगर कोई पहले से शादीशुदा है, तो दूसरी शादी का कोई प्रावधान नहीं है.”

उन्होंने Chief Minister के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “अगर फिर भी कोई शादी करता है तो Chief Minister का यह कदम बहुत अच्छा है.”

जमीयत उलेमा शामली के अध्यक्ष का कहना है कि समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा और पारिवारिक मूल्यों का ह्रास एक बड़ी समस्या बन गई है. ऐसे में असम Government के ये दोनों फैसले सराहनीय हैं. पहला फैसला बुजुर्ग माता-पिता को आर्थिक सुरक्षा देगा और दूसरा फैसला विवाह संस्था की मर्यादा को बचाएगा.

पीआईएम/पीएम