ईरान के साथ शांति प्रयासों में खाड़ी देश के सहयोगी अहम: मार्को रुबियो

वॉशिंगटन, 24 जून . अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के साथ शांति प्रस्ताव को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के साथ शांति के लिए एक रूपरेखा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में हुई प्रगति के बावजूद, अभी भी काफी काम बाकी है.

अबू धाबी पहुंचने पर पत्रकारों से बात करते हुए रुबियो की ओर से कहा गया कि अमेरिका को ईरान की ओर से किए गए वादों की साफ समझ है, भले ही ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से उभरते हुए फ्रेमवर्क के कुछ हिस्सों पर असहमति जताई हो.

रुबियो ने कहा, “हमें पता है कि वे किस बात पर सहमत हुए थे.” जब उनसे इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) की ओर से निरीक्षण के बारे में ईरान की टिप्पणियों को लेकर पूछा गया, तो उनकी ओर से कहा गया कि उनकी अंदरूनी या घरेलू राजनीति चाहे जैसी भी हो, मुझे लगता है कि वे उसे संभाल लेंगे. लेकिन हमें पता है कि वे क्या करने पर सहमत हुए थे, और अब या तो वे इसे करेंगे या नहीं करेंगे.

उन्होंने आगे कहा कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो “प्रक्रिया आगे बढ़ेगी,” लेकिन चेतावनी दी कि अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो “President को कुछ फैसले लेने होंगे.” रुबियो की ये टिप्पणियां उस वक्त आईं हैं, जब ट्रंप प्रशासन स्विट्जरलैंड में वीकेंड में हुई बातचीत के बाद खाड़ी क्षेत्र में राजनयिक संपर्क बनाए हुए था.

संयुक्त अरब अमीरात को वाशिंगटन के सबसे मजबूत साझेदारों में से एक बताते हुए, रुबियो ने कहा कि पिछले दशक में यह रिश्ता और गहरा हुआ है. उन्होंने कहा, “हम यहां बात करने से ज्यादा उनकी बात सुनने आए हैं. हम उनके विचार जानना चाहते हैं, खासकर स्विट्जरलैंड में इस वीकेंड के बाद, और यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे हर फैसले में उनकी राय को ध्यान में रखा जाए क्योंकि वे हमारे साझेदार हैं.”

जब उनसे पूछा गया कि क्या खाड़ी सहयोगी ईरान शांति फ्रेमवर्क का समर्थन करते हैं, तो रुबियो ने कहा कि सभी अमेरिकी साझेदार शांति के पक्ष में हैं, लेकिन बातचीत अभी शुरुआती चरण में है. उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जो 47 सालों से चला रहा है. इसलिए यह सोचना कि यह किसी तरह डेढ़ दिन में हल हो जाएगा, मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा दावा कर रहा है.”

रुबियो ने कहा कि अब एक फ्रेमवर्क और रूपरेखा मौजूद है, ‘जिस पर हम वास्तविक प्रगति कर सकते हैं,’ और कहा कि ‘पिछले 72 घंटों में अच्छी नींव रखी गई है.’ रुबियो ने कहा कि भविष्य के किसी भी आर्थिक अवसर का दारोमदार ईरान के नेतृत्व की ओर से लिए गए फैसलों और व्यापक सुरक्षा मुद्दों पर हुई प्रगति पर होगा.

उन्होंने कहा, “यह हमारा निवेश नहीं होगा. यह हमारी Government का पैसा नहीं होगा.” क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं पर, रुबियो ने संकेत दिया कि मौजूदा समझौते (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) से आगे के मुद्दों पर भविष्य की बातचीत में चर्चा की जाएगी.

ईरान समर्थित समूहों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक प्रॉक्सी (ईरान के इशारे पर काम करने वाले समूह) हमले करते रहेंगे, तब तक क्षेत्रीय दुश्मनी को पूरी तरह खत्म करना असंभव होगा. उन्होंने कहा, “जब तक ईरान के प्रॉक्सी इराक से मिसाइल और ड्रोन दागते रहेंगे और हमास या हिज्बुल्लाह की तरह आतंकवाद में शामिल रहेंगे, तब तक इस क्षेत्र में दुश्मनी और संघर्ष खत्म नहीं हो सकते.”

रुबियो ने इस बात पर भी जोर दिया कि लेबनान और इजरायल से जुड़ी बातचीत को ईरान के साथ होने वाली बातचीत से अलग रखा जाना चाहिए. वाशिंगटन में लेबनान और इजरायल के अधिकारियों के बीच चल रही बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लेबनान का भविष्य उसकी अपनी संप्रभु Government तय करे.

उन्होंने कहा कि लेबनान का भविष्य वहां के लोगों का है, जिसे उनकी संप्रभु चुनी हुई Government तय करेगी, और हम उन्हीं के साथ मिलकर काम करेंगे.

होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से जहाजों की आवाजाही की आजादी पर, रुबियो ने वाशिंगटन के इस रुख को दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह जलमार्ग खुला रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या फीस वसूलने की इजाजत नहीं है.

एसडी/एएस