देश के कई राज्यों ने खोले स्कूल-कॉलेज, कई असमंजस में, राजस्थान ने वापस लिया दो अगस्त से स्कूल खोलने का फैसला

नई दिल्ली (New Delhi) . कोरोना की पहली लहर कमजोर पड़ने के बाद कुछ राज्यों में स्कूल खुल ही रहे थे कि महामारी (Epidemic) की दूसरी लहर आ गई. अब जब दूसरी लहर भी नियंत्रण में दिख रही है, तो कई राज्यों ने जुलाई के आखिर और अगस्त की पहले-दूसरे हफ्ते में फिर से स्कूल खोलने की योजना बनाई है. इस बीच, राजस्थान (Rajasthan)सरकार ने 2 अगस्त से स्कूल खोलने का फैसला वापस ले लिया है.

मुख्यमंत्री (Chief Minister) अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा अब स्कूल खोलने का फैसला नए सिरे से लिया जाएगा और इसके लिए एक एक्सपर्ट कमिटी गठित की जाएगी. उन्होंने कहा कि कमिटी में राज्य सरकार (State government) के 5 मंत्री शामिल होंगे. सीएम के आदेशानुसार, शिक्षा मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कृषि मंत्री, उच्च शिक्षा विभाग में राज्य मंत्री और तकनीकी शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री को मिलाकर कमिटी गठित की जाएगी. मुख्यमंत्री (Chief Minister) ने यह फैसला कोविड-19 (Covid-19) की तीसरी लहर आने की आशंका में किया है. उन्होंने बताया राज्य सरकार (State government) की कमिटी केंद्र सरकार (Central Government)के शिक्षा मंत्रालय और आईसीएमआर से संपर्क करेगी और उनकी राय के आधार पर एसओपी तैयार किया जाएगा. इससे पहले, शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि राजस्थान (Rajasthan)में 2 अगस्त से बच्चों के स्कूल खोले जा सकते हैं.

इससे पहले पुदुचेरी की सरकार ने भी 16 जुलाई से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्कूल खोलने का फैसला वापस ले लिया था. कर्नाटक (Karnataka) सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकंड्री एजुकेशन ने स्कूल खोलने को लेकर एक्सपर्ट कमिटी गठित की है जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है. कमिटी ने कर्नाटक (Karnataka) सरकार से कहा है कि राज्य में सभी प्री-प्राइमरी और लोअर प्राइमरी कक्षाएं 2 अगस्त से शुरू की जा सकती हैं. कमिटी ने सरकार के सामने दो विकल्प रखे हैं. उसने कहा सरकार को सभी कक्षा के बच्चों के लिए स्कूल एक साथ खोल दिए जाने चाहिए, लेकिन अगर वह ऐसा नहीं चाहती है और उसे लगता है कि स्कूल चरण-दर-चरण खुलने चाहिए तो फिर सबसे पहले कक्षा एक से पाचवीं तक के स्कूल खुलने चाहिए. स्कूलों में भीड़भाड़ कम करने के लिए कमिटी ने कक्षा एक से तीन के बच्चों को सुबह, जबकि कक्षा चार और पांच के बच्चों को दोपहर में स्कूल बुलाने की सिफारिश की है.

उसका सुझाव है कि कक्षा एक से पांच तक कक्षा चलने के एक सप्ताह बाद कक्षा छह से 12वीं तक के स्कूल भी खोले जा सकते हैं. सरकार ने समिति की सिफारिश मानी तो वहां हरेक कक्षा सप्ताह में कम-से-कम छह दिन और रह दिन तीन घंटे तक चलेगी. कमिटी ने कहा है कि जिन स्कूलों में बच्चे कम हैं, वहां सभी बच्चों को एक साथ बुलाया जा सकता है, लेकिन जहां बच्चे बहुत ज्यादा हैं, वहां अलग-अलग बैच बनाकर बच्चों को बुलाएं. कमिटी ने कहा चूंकि बहुत ज्यादा वक्त बर्बाद हो चुका है, इसलिए स्कूल की छुट्टियां कम की जाएं.
प. बंगाल सरकार ने स्कूल खोलने का फैसला अब तक नहीं किया है, लेकिन वहां सबसे पहले वरिष्ठ छात्रों को बुलाने पर विचार किया जा रहा है. शिक्षा विभाग के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा कि तीसरी लहर की आशंका के कारण राज्य सरकार (State government) स्कूल खोलने की जल्दबाजी नहीं कर रही है, लेकिन सब सामान्य रहा तो सबसे पहले कक्षा 9 से 12वीं के बच्चों को ही सबसे पहले स्कूल बुलाया जाएगा. अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि वहां पहले प्राइमरी स्कूल नहीं खोले जाएंगे जिसका सुझाव आईसीएमआर ने दिया था.
केरल (Kerala) के साथ महाराष्ट्र (Maharashtra) ही ऐसा राज्य है जहां से अब बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा कोविड केस आ रहे हैं, फिर भी वहां ग्रामीण इलाकों में स्कूल खोल दिए गए हैं. महाराष्ट्री की उद्धव ठाकरे सरकार ने 15 जुलाई से शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने का आदेश जारी किया था. स्कूल खुलने के पहले सप्ताह महाराष्ट्र (Maharashtra) के ग्रामीण इलाकों में 9वीं से 12वीं क्लास के चार लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंचे थे.
तेलंगाना में कोविड-19 (Covid-19) महामारी (Epidemic) कमजोर पड़ रही है, इसलिए राज्य सरकार (State government) स्कूल खोलने पर विचार कर रही है. जगन मोहन रेड्डी की सरकार ने स्कूल, जूनियर, कॉलेज, डिग्री कॉलेज, टेक्निकल कॉलज और दूसरे शैक्षिक संस्थानों को 1 जुलाई से खोलने का आदेश दिया था जिसे बाद में वापस ले लिया गया. अब वहां अगस्त के पहले सप्ताह में सारे शैक्षिक संस्थान खोलने की योजना बन रही है.
एक तरफ तीसरी लहर की आशंका तो दूसरी लहर बच्चों की पढ़ाई की चिंता, इनके बीच कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्कूल खोलने को लेकर अपनी राय दी है. दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि बच्चों का क्लास में जाकर शिक्षकों से सीधे सवाल-जवाब करना बहुत जरूरी है, इसलिए स्कूल खुलने चाहिए.
बहुत से बच्चों के पास ऑनलाइन क्लास लेने की सुविधा नहीं है, लेकिन इस बात का ख्याल भी रखना होगा कि बच्चे स्कूल जाएं तो वहां दूसरे बच्चों से बहुत घुलें-मिलें नहीं, उचित दूरी बनाकर रखें, खाने-पीने या अन्य सामानों का लेन-देन नहीं करें, यानी कुल मिलाकर कोविड प्रॉटोकॉल का ज्यादा से ज्यादा ध्यान रखें. उधर, सरकार ने पिछले महीने में कहा था कि अगर स्कूल के ज्यादातर स्टाफ टीका लगवा लें तो स्कूल खोले जा सकते हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा था कि प्राइमरी कक्षा के बच्चों को स्कूल बुलाया जा सकता है. उन्होंने कहा था कि बच्चे कोरोना (Corona virus) से बड़ों के मुकाबले बेहतर तरीके से लड़ पाते हैं, इसलिए पहले उन्हें ही स्कूल बुलाना चाहिए और फिर धीरे-धीरे मिडल और हाई स्कूल भी खोले जा सकते हैं. लेकिन, ज्यादातर राज्य इस सलाह के उलट कक्षा 9 से 12वीं के बच्चों को स्कूल बुलाने का मन बना रहे हैं. दरअसल, सरकार बोर्ड एग्जाम के मद्देनजर सीनियर स्टूडेंट्स को पहले स्कूल बुलाना चाहते हैं.

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