ममता बनर्जी ही मेरी नेता, अभिषेक ने भी टीएमसी के लिए दिया है बड़ा योगदान : शत्रुघ्न सिन्हा

Patna, 7 अगस्त . तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी को अपना एकमात्र नेता बताते हुए सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने अभिषेक को संसद के सबसे अच्छे वक्ताओं में से भी एक बताया.

से खास बातचीत में Actor से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की बड़ी जीत की भी सराहना की.

जब उनसे पूछा गया कि तृणमूल कांग्रेस से कई नेताओं ने पार्टी छोड़ी है, लेकिन आप लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे हैं. इस पर आप क्या कहेंगे? इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जब मैं 2019 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में Patna से चुनाव हार गया था, तब किसी ने भी मेरा हालचाल नहीं पूछा. मैं 1996 से संसद में रहा हूं, लेकिन उस कठिन समय में कोई भी मेरे पास नहीं आया. सिर्फ ममता बनर्जी ने मुझे व्यक्तिगत रूप से फोन किया. इससे मुझे उनके विश्वास का एहसास हुआ.

उन्होंने कहा कि बाबुल सुप्रियो के भाजपा छोड़ने के बाद जब आसनसोल Lok Sabha उपचुनाव हुआ, तो ममता बनर्जी ने बिना मुझसे पूछे मेरे नाम की घोषणा कर दी. मैं इससे पहले कभी आसनसोल भी नहीं गया था जबकि करीब 30 साल तक भाजपा का स्टार प्रचारक रहा था. नाम घोषित करने के बाद ममता दीदी ने मुझे इसकी जानकारी दी. उस समय मुझे उपचुनाव के बारे में भी पता नहीं था. फिर मैं आसनसोल गया, नामांकन भरा और आगे की कहानी सब जानते हैं. मैंने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की. तब से मैं ममता जी के साथ काम कर रहा हूं. वह एक बड़ी नेता हैं, जमीन से जुड़ी हुई हैं, संघर्ष करने वाली और मजबूत व्यक्तित्व की महिला हैं.

उन्होंने कहा कि जब मैं Patna से बुरी तरह चुनाव हार गया था, तब सिर्फ ममता जी मेरे साथ खड़ी थीं. आज जब उनके लिए मुश्किल समय है, तब कई बातें हुईं. बंगाल चुनाव के दौरान एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) हुआ, जिसमें कथित गड़बड़ियों के कारण 60 से 65 लाख नाम हटाए गए. इसके बावजूद उनकी वोट हिस्सेदारी सत्ताधारी पार्टी की तुलना में केवल 3-4 प्रतिशत ही घटी. हालांकि सीटें कम मिलीं और इसके ऊपर कुछ लोग घबराहट में पार्टी छोड़कर दूसरी तरफ चले गए. जब नाव डूबने लगती है, तो कई लोग उसे छोड़कर भाग जाते हैं.

उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ भी कई आरोप लगाए गए. तब मैंने सोचा कि स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है. मैं सिद्धांतों और नैतिकता में विश्वास रखने वाला व्यक्ति हूं. मेरा मानना है कि “एक बार दोस्त, हमेशा दोस्त”. मैं न किसी लालच में आता हूं और न किसी से डरता हूं. इसलिए मैंने सार्वजनिक रूप से कहा कि मैं ममता बनर्जी के साथ हूं.

बागी नेताओं ने खास तौर पर अभिषेक बनर्जी को निशाना बनाया है. आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि अभिषेक बनर्जी मेरे नेता नहीं हैं. मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह नहीं जानता और न ही उन्हें अपना नेता मानता हूं. मेरी नेता सिर्फ ममता बनर्जी हैं, और कोई नहीं. बाकी सभी मेरे सहयोगी हैं लेकिन अभिषेक बनर्जी एक बहुत सक्षम व्यक्ति, अच्छे इंसान और मजबूत नेता हैं. राहुल गांधी और संजय सिंह की तरह, मैं मानता हूं कि अभिषेक बनर्जी संसद के सबसे अच्छे वक्ताओं में से एक हैं, जो तथ्य, सच्चाई और तर्क के साथ अपनी बात रखते हैं.

उन्होंने कहा कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ शिकायतें विधानसभा चुनाव हारने के करीब एक महीने बाद शुरू हुईं. उससे पहले यही लोग उनकी बात सुनते थे और संगठन भी वही संभाल रहे थे. उन लोगों ने आई-पैक को भी बदनाम करना शुरू कर दिया. अच्छा हुआ कि तब तक प्रशांत किशोर आई-पैक से अलग हो चुके थे, नहीं तो लोग उनके बारे में भी नकारात्मक बातें करते. यह सब हार से पैदा हुई घबराहट और निराशा का नतीजा था. अचानक वही लोग दीदी के भी खिलाफ हो गए, जिन्हें पहले वे मां समान बताते थे. मुझे उन पर गुस्से से ज्यादा हैरानी हुई.

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत पर आपका क्या कहना है? इस सवाल के जवाब में टीएमसी सांसद शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि मैं शुरू से कहता आया हूं कि प्रशांत किशोर बहुत सक्षम व्यक्ति हैं. जिस सोच के साथ मैं राजनीति में आया था, उसे उन्होंने सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है. वह सोच है कि “अगर अच्छे लोग राजनीति में आने को तैयार नहीं होंगे, तो उन्हें बुरे लोगों द्वारा शासित होने के लिए तैयार रहना होगा.” प्रशांत किशोर पढ़े-लिखे, परिपक्व और सक्षम व्यक्ति हैं. उन्हें देश ही नहीं, दुनिया की भी अच्छी समझ है.

उन्होंने कहा कि मुझे हैरानी हुई कि उन्हें Patna में चुनाव लड़ने के बावजूद बाहरी कहा गया. जब मैं आसनसोल से चुनाव लड़ रहा था, तब मुझे भी यही कहा गया था. उस समय मैंने जवाब दिया था कि अगर इंदिरा गांधी रायबरेली से, सुषमा स्वराज कर्नाटक से, जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से और सबसे महत्वपूर्ण Narendra Modi Gujarat के बजाय वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं, तो मैं और प्रशांत किशोर क्यों नहीं लड़ सकते, जबकि हम दोनों अलग राज्य या जिले से आते हैं. जिस व्यक्ति की पार्टी पिछले साल एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, उसने भाजपा के उस घमंड को तोड़ दिया, जो बांकीपुर सीट पर अपना दबदबा मान रही थी. यह जनता की ताकत है.

जब शत्रुघन सिन्हा से पूछा गया कि जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन के बाद Jharkhand में भी आंदोलन चल रहा है. आप इसे कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें बिल्कुल जायज हैं और उन्हें न्याय मिलना चाहिए. विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हुए हैं. Government इसे रोकने में असफल रही है और सिर्फ आश्वासन देती रही है. चाहे दिल्ली के जंतर-मंतर का प्रदर्शन हो या Jharkhand में छात्रों का आंदोलन, अगर Government कार्रवाई नहीं करेगी तो लोग अपनी आवाज उठाएंगे. उनकी चिंताओं को सुना और दूर किया जाना चाहिए.

पश्चिम बंगाल में भाजपा Government से आपकी क्या उम्मीदें हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे Chief Minister सुवेंदु अधिकारी से उम्मीद है कि वे बंगाल के विकास के लिए काम करेंगे. साथ ही विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी से भी. मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वे अच्छे लोग हैं. उन्हें राज्य में कानून का राज, शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए. बंगाल, खासकर आसनसोल, भाईचारे के शहर के रूप में जाना जाता है, जहां सभी धर्मों के लोग आपसी सम्मान के साथ रहते हैं.

एएमटी/पीएम