
कोलकाता, 6 मई . त्रिपुरा के पूर्व Governor तथागत रॉय ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत और Chief Minister ममता बनर्जी के अड़ियल रवैये को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बंगाल में भाजपा के लंबे संघर्ष को याद किया और कहा कि उम्मीद जताई की नई Government राज्य को ऊपर लेकर जाएगी.
पूर्व Governor तथागत रॉय ने समाचार एजेंसी से बातचीत में हिंसा-मुक्त चुनाव, भारतीय निर्वाचन आयोग पर टीएमसी के आरोप और हार के बाद ममता बनर्जी के बयानों समेत कई विषयों पर अपने जवाब दिए.
सवाल: भाजपा पहली बार पश्चिम बंगाल में Government बनाने जा रही है. आप इस Political बदलाव को कैसे देखते हैं?
जवाब: भाजपा के संघर्ष की शुरुआत बहुत दिन पहले हुई थी. भारतीय जनसंघ 1951 में बना और उसके संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे. इसका मतलब साफ है कि भारतीय जनसंघ से निकली भाजपा पश्चिम बंगाल की ही पार्टी है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बाद कोई ऐसा नहीं आ पाया, जो भारतीय जनसंघ को संभाल सकता था. इसके चलते ही पार्टी बहुत छोटी हुई. एक समय भाजपा की स्थिति वर्तमान कांग्रेस और सीपीएम के जैसी थी. राम मंदिर आंदोलन के बाद भाजपा उभरी. 2014 में Narendra Modi के Prime Minister बनने के बाद स्थितियां बिल्कुल बदल गईं.
2016 में बंगाल में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया और फिर राज्य में लगातार पार्टी का ग्राफ बढ़ता रहा. दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि 2021 में भाजपा बंगाल में चुनाव नहीं जीत पाई. हालांकि, इसके बाद से भाजपा ने अपने प्रयास तेज कर दिए. केंद्र के नेताओं ने राज्य इकाई को मजबूत बनाने का काम किया. 2026 की जीत उसी का परिणाम है.
सवाल: राज्य में नई Government से आपकी क्या उम्मीदें हैं?
जवाब: पिछली Governmentों में पश्चिम बंगाल को पीछे धकेलने का काम किया गया. यह काम पहले सीपीएम ने किया और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने राज्य को पीछे धकेला. उम्मीद है कि नई भाजपा Government पश्चिम बंगाल को उसके हालातों से उभारकर ऊपर लाएगी. वर्तमान में राज्य की कानून व्यवस्था बहुत खराब है. भाजपा Government को सबसे पहले राज्य की कानून व्यवस्था को सुधारना होगा. इसके अलावा, भ्रष्टाचार और टोलाबाजी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी होगी.
सवाल: स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसा-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका का आप कैसे आकलन करते हैं?
जवाब: निश्चित रूप से निर्वाचन आयोग ने अच्छे से चुनाव संपन्न कराया है. पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को सीपीएम ने 1960 से बढ़ाना शुरू किया था. हर चुनाव के समय हिंसा होती रही. 1988 में चुनाव के समय कांग्रेस को वोट देने पर कई लोगों के हाथ का पंजा ही काट दिया गया था. इसके खिलाफ कांग्रेस ने भी कोई एक्शन नहीं लिया. टीएमसी के समय में सिर्फ चुनाव के वक्त नहीं, बल्कि किसी भी समय हिंसा हो जाती थी. हालांकि, भारतीय निर्वाचन आयोग ने चुनाव के समय इस बार पूरी तरह इसे रोक दिया.
सवाल: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे चुनाव हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें हराया गया है. आप इन दावों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं?
जवाब: ममता बनर्जी का आचरण एक छोटी बच्ची के जैसा है. उन्हें अपने आरोप साबित करने चाहिए.
सवाल: ममता बनर्जी ने कहा है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और जोर देकर कहा है कि वह हारी नहीं हैं. आप इस रुख की क्या व्याख्या करते हैं?
जवाब: संविधान के ढांचे को ममता बनर्जी अकेले नहीं गिरा सकती हैं. 8 तारीख को वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल ही खत्म हो जाएगा. नियम के अनुसार, उसके बाद Chief Minister को पद छोड़ना ही पड़ता है. विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही स्वत: President शासन लगता है. इसके बाद Governor चुनाव में जीतने वाले सबसे बड़े दल को बुलाएंगे और फिर नई Government का गठन होगा.
सवाल: आपको क्या लगता है कि ममता बनर्जी अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के व्यवहार की पुनरावृत्ति कर रही हैं, जिन्होंने एक समय इस्तीफा देने से इनकार किया था?
जवाब: मुझे लगता है कि ममता बनर्जी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. एक बात स्पष्ट है कि अमेरिका और India के संविधान में काफी फर्क है. ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, और उन्हें पद छोड़ना ही पड़ेगा.
सवाल: राहुल गांधी ने बंगाल चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और कहा है कि विपक्षी दलों को ममता बनर्जी की हार का जश्न नहीं मनाना चाहिए. यह ममता बनर्जी की हार नहीं, ‘इंडिया’ गठबंधन की हार है. आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: राहुल गांधी की बातों का कोई मतलब नहीं है. उनके इंटरव्यू देखने के बाद हंसी आती है.
–
डीसीएच/
Skip to content