महाराष्ट्र: कार्यस्थल पर उत्पीड़न रोकने को बनेगी महिला विधायकों की विशेष समिति, सीएम फडणवीस ने किया ऐलान

Mumbai , 24 जून . कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न की घटनाओं से निपटने के लिए Maharashtra Government ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. Chief Minister देवेंद्र फडणवीस ने Wednesday को विधान परिषद में घोषणा की कि विधानसभा और विधान परिषद की महिला विधायकों की एक संयुक्त समिति गठित की जाएगी, जो कॉर्पोरेट कार्यस्थलों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मौजूदा कानूनों और दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगी.

यह समिति वर्तमान कानूनी व्यवस्था का अध्ययन करेगी, हाल की घटनाओं की जांच करेगी और आवश्यक सुधारों की सिफारिश करेगी. राज्य Government ने भरोसा दिलाया है कि समिति की सिफारिशों को लागू कर महिलाओं के लिए कार्यस्थलों को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा.

यह फैसला परिषद सदस्य चित्रा वाघ द्वारा नासिक में महिला कर्मचारियों के यौन और मानसिक उत्पीड़न से जुड़े गंभीर आरोप उठाए जाने के बाद लिया गया. इस मुद्दे पर नीलम गोर्हे और मनीषा कायंदे सहित कई विधायकों ने चर्चा में हिस्सा लिया.

Chief Minister फडणवीस ने बताया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम अपनी जांच लगभग पूरी कर चुकी है. शिकायतों के आधार पर अब तक नौ अलग-अलग First Information Report दर्ज की गई हैं. पीड़िता की शुरुआती शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले मैनेजर को भी आरोपी बनाया गया है.

Chief Minister ने स्पष्ट किया कि जांच में सामने आया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा महिलाओं को निशाना बनाकर उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप हैं. एसआईटी को कंपनी की संस्थागत भूमिका का कोई प्रमाण नहीं मिला है. संबंधित कंपनी ने जांच में पूरा सहयोग दिया है और Government द्वारा तय किए जाने वाले सभी सुरक्षा उपाय लागू करने की बात कही है.

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ”किसी एक घटना के आधार पर देश की अग्रणी आईटी कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा. कॉर्पोरेट क्षेत्र ने India को वैश्विक पहचान दिलाई है और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.”

Chief Minister ने सदन को भरोसा दिलाया कि कार्यस्थल सुरक्षा से जुड़ी अन्य शिकायतों पर भी तेजी से कार्रवाई की जाएगी. विधायक मनीषा कायंदे द्वारा सोलापुर के एक सरकारी आईटीआई से जुड़ी शिकायत की तत्काल जांच कराई जाएगी.

इसके अलावा पुणे के पास तालेगांव दाभाडे में स्थित एक विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनी के खिलाफ मिली शिकायत की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं. दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ 15 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

बता दें कि अप्रैल और मई 2026 में नासिक में सामने आए एक चर्चित मामले के बाद यह कदम उठाया गया है. इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था. एनसीडब्ल्यू की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी, जिसकी अगुवाई सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस साधना जाधव कर रही थीं. इस कमेटी की जांच के दौरान कार्यस्थल के माहौल को ‘बेहद विषाक्त’ बताया था.

एनसीडब्ल्यू की 50 पन्नों की रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के पालन में गंभीर खामियां, शिकायत निवारण तंत्र की विफलता और डर का माहौल होने की बात कही गई थी. पीड़िताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ वरिष्ठ कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग कर महिला कर्मचारियों का पीछा करते थे, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे और उनके धर्म के खिलाफ बोलने तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाते थे.

नासिक Police की 12 सदस्यीय एसआईटी ने इस मामले में कई आरोपियों के खिलाफ 1,500 पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की है. इनमें कंपनी से जुड़े कई लोगों का नाम शामिल है.

Government द्वारा गठित की जाने वाली नई समिति यह भी जांच करेगी कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए लागू दिशानिर्देशों को कानूनी रूप से और अधिक सख्त कैसे बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

एएमटी/डीकेपी