
New Delhi, 12 जून . देश में महंगाई दर का 4 प्रतिशत से कम होना, अर्थव्यवस्था के लचीलापन और Government द्वारा कीमतों को स्थिर रखने के प्रयासों को दिखाता है. यह बयान इंडस्ट्री बॉडी पीएचडीसीसीआई की ओर से Friday को दिया गया.
मई में खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 3.93 प्रतिशत रही है, जो कि आरबीआई की ओर से महंगाई के मध्यम अवधि के टारगेट 4 प्रतिशत से कम है. हालांकि, यह अप्रैल के खुदरा महंगाई के आंकड़े 3.48 प्रतिशत से अधिक है.
वहीं, खाद्य मंहगाई दर मई में 4.78 प्रतिशत रही है, जो कि अप्रैल में 4.20 प्रतिशत थी. इसकी वजह टमाटर, अदरक और ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में इजाफा होना था.
पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा, “खाने-पीने की चीजों की कीमतें मौसम के हिसाब से बदलती रहती हैं, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई काबू में है, जिससे परिवारों की खरीदने की क्षमता बनी हुई है.”
पीएचडीसीसीआई ने आगे कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में लगातार सुधार, ऊर्जा की स्थिर कीमतें और घरेलू अर्थव्यवस्था के अच्छे हालात से आने वाले महीनों में महंगाई को काबू में रखने की कोशिशों को मदद मिलने की उम्मीद है.
क्रिसिल की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे के अनुसार, इस वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर पिछले वित्त वर्ष से 2 प्रतिशत बढ़कर औसतन 5.1 प्रतिशत होने की उम्मीद है. इसके पीछे ईंधन की ऊंची कीमतें, करेंसी की वैल्यू में गिरावट और बारिश कम होने की संभावना जैसे जोखिम हैं.
आईसीआरए के मुख्य अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि हालांकि, खुदरा महंगाई दर अप्रैल में 3.5 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.9 प्रतिशत हो गई है, लेकिन यह हमारे अनुमान 4.1 प्रतिशत से कम रही है.
उन्होंने आगे कहा कि इस महंगाई की वजह खाने-पीने की चीजें, ट्रांसपोर्ट, रेस्टोरेंट और पर्सनल केयर उत्पादों के दाम बढ़ना था. इनमें से आखिरी तीन पर पेट्रोल-डीजल, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और सोने-चांदी पर कस्टम ड्यूटी में हुई बढ़ोतरी का असर दिखा.
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एबीएस
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