
New Delhi, 4 जून . केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने Thursday को कहा कि दुनिया भर का दीर्घकालिक निवेश अब तेजी से India की ओर रुख कर रहा है. उन्होंने कहा कि हाल ही में न्यूयॉर्क और टोरंटो के प्रमुख निवेशकों के साथ हुई उनकी बैठकों में हर चर्चा ने India की भविष्य की विकास यात्रा पर भरोसे को और मजबूत किया.
उन्होंने कहा कि अब निवेशकों के सामने सवाल यह नहीं है कि India में निवेश करना है या नहीं, बल्कि यह है कि वे India की विकास गाथा को कितनी जल्दी पहचानते हैं और उसमें कितनी तेजी से भागीदारी करते हैं.
Mumbai में आयोजित ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ को वर्चुअली संबोधित करते हुए Union Minister पीयूष गोयल ने India को दुनिया का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य बताया. उन्होंने विनिर्माण, कारोबार करने में आसानी, बुनियादी ढांचे, तकनीक अपनाने और वैश्विक व्यापार साझेदारी को मजबूत करने के लिए Government द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी रूपरेखा प्रस्तुत की.
वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि India दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जा रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले दो दशकों से अधिक समय तक भी India इस स्थिति को बनाए रखेगा.
गोयल ने कहा कि India ने हर संकट को अवसर में बदलने का काम किया है. देश ने बदलते भू-Political और आर्थिक हालात के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं और कारोबारी रणनीतियों को ढाला है, जबकि व्यापार, विनिर्माण, निवेश और उद्योग के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है.
कनाडा की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि India से अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल उनके साथ गया था. उन्होंने भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर मिले सकारात्मक संकेतों और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा अन्य संस्थागत निवेशकों की मजबूत रुचि का उल्लेख किया.
उन्होंने आगे कहा कि न्यूयॉर्क में प्रमुख निवेश फर्मों और लगभग 50 कंपनियों के साथ हुई चर्चाओं ने इस धारणा को और मजबूत किया कि India दुनिया के लिए एक विश्वसनीय वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र, भरोसेमंद साझेदार और सुरक्षित निवेश गंतव्य है. इसके पीछे लोकतंत्र, कानून का शासन, निर्णायक नेतृत्व, तकनीकी क्षमता और 140 करोड़ लोगों का विशाल उपभोक्ता बाजार प्रमुख कारण हैं.
India में सफल दीर्घकालिक निवेशों के उदाहरण देते हुए मंत्री ने बताया कि हुंडई ने वर्ष 1999 में लगभग 20 करोड़ डॉलर के निवेश के साथ India में प्रवेश किया था. उस समय बुनियादी ढांचा सीमित था, लेकिन कंपनी ने India में विनिर्माण गतिविधियों के जरिए वर्षों में बड़ा मूल्य सृजित किया और लाभांश, रॉयल्टी तथा पूंजीगत लाभ के रूप में उल्लेखनीय रिटर्न हासिल किया.
उन्होंने जेसीबी का उदाहरण भी दिया और कहा कि कंपनी उस समय India आई थी जब देश में बुनियादी ढांचा विकास शुरुआती चरण में था. आज जेसीबी India में निर्मित उत्पादों को लगभग 130 देशों में निर्यात कर रही है और साथ ही घरेलू मांग को भी पूरा कर रही है.
गोयल ने कहा कि ये उदाहरण दिखाते हैं कि India घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण का समर्थन करने की क्षमता रखता है.
वैश्विक निवेशकों को India की विकास यात्रा का हिस्सा बनने का निमंत्रण देते हुए उन्होंने कहा कि India केवल एक बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार ही नहीं है, बल्कि नवाचार, डिजाइन और उन्नत विनिर्माण का भी केंद्र बन रहा है. उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया कि वे धैर्यपूर्ण और दीर्घकालिक पूंजी निवेश के साथ India की नई तकनीकों और भविष्य के उद्योगों की यात्रा में भागीदार बनें.
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डीबीपी
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