लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाई

New Delhi, 19 जुलाई . Lok Sabha स्पीकर ओम बिड़ला ने संसद के मानसून सत्र के लिए रोजाना के विधायी कामकाज का शेड्यूल तय करने और उसे मैनेज करने के लिए Sunday शाम 5 बजे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक बुलाई है.

मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा. चार सप्ताह के इस सत्र में 19 बैठकें होंगी. अभी संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में सर्वदलीय बैठक चल रही है. Government संसद के दोनों सदनों के सुचारू कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए सभी Political दलों से सहयोग की अपील करेगी.

हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद, ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (एनसीपीआई) के सदस्यों की मौजूदगी का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया.

तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद, डीएमके और कांग्रेस के बीच दरार और उद्धव सेना से नेताओं के अलग होने से संसद का स्वरूप बदलने की संभावना है.

उम्मीद है कि सत्ताधारी एनडीए की संख्या बढ़ेगी, जबकि विपक्षी गठबंधन की संख्या में कमी आ सकती है.

Lok Sabha स्पीकर तृणमूल के 20 बागी सांसदों के कम चर्चित एनसीपीआई में विलय के बारे में फैसला लेंगे. वह उद्धव सेना के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय पर भी निर्णय लेंगे.

इस बीच, तमिलनाडु में कांग्रेस और टीवीके के गठबंधन के बाद डीएमके ने स्पीकर को पत्र लिखकर अपने सांसदों के लिए कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है.

इसके अलावा, महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वें संविधान संशोधन विधेयक को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है, जिसे पिछले सत्र में खारिज कर दिया गया था.

उम्मीद है कि Government 130वां संविधान संशोधन बिल भी पेश करेगी. इसका मकसद Chief Minister , मंत्री और Prime Minister को उनके पद से अपने-आप हटाना है, अगर उन्हें गंभीर अपराधों के मामलों में लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है या वे न्यायिक हिरासत में रहते हैं.

केंद्र के एजेंडे में ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल के भी शामिल होने की उम्मीद है. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसीआरए) विकसित India शिक्षा अधिष्ठान बिल और एंटी-डोपिंग बिल पेश किए जाने की उम्मीद है.

Supreme Court के जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश की जगह लेने वाले प्रस्तावों के साथ-साथ, ‘कोड ऑन वेजेज सेंट्रल रूल्स’, कॉर्पोरेट कानून और सिक्योरिटीज मार्केट कोड से जुड़े बिल भी पेश किए जा सकते हैं.

ओपी/पीएम