
New Delhi, 3 अगस्त . संसद के मानसून सत्र के दौरान Monday को भी Lok Sabha की कार्यवाही विपक्ष के हंगामे के कारण प्रभावित रही. विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ कर रहे छात्रों पर दिल्ली Police की कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर जवाब देने की मांग की. वहीं, एनडीए के सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है और चर्चा से बचना चाहता है.
विपक्षी सांसदों का कहना था कि दिल्ली Police गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है. ऐसे में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सदन में जवाब देना चाहिए.
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष लगातार यह मांग कर रहा है कि छात्रों पर हुई Police कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर जवाब दें. इतने दिन बीतने के बावजूद भी वे सदन में जवाब देने के लिए नहीं आए हैं.
कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. हमारे नेता राहुल गांधी ने बिल्कुल सही सवाल उठाया है कि जिस तरह का व्यवहार छात्रों के साथ किया गया. दिल्ली Policeकर्मियों ने किसके आदेश पर कार्रवाई की थी?
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने दावा किया कि सदन सत्तापक्ष की वजह से नहीं चल रहा है. विपक्ष की मांग बिल्कुल जायज है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में नहीं आ रहे हैं. मुझे लगता है कि वे Government को भी social media से चलाना चाहते हैं. सदन की गरिमा होती है, सभी को आदर करना चाहिए, भले वे सत्ता पक्ष ही क्यों न हो.
दूसरी ओर, BJP MP त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है, इसके लिए विपक्ष की निंदा होनी चाहिए. लोग चाहते हैं कि संसद में उनके चुने हुए प्रतिनिधियों के जरिए उनकी आवाज सुनी जाए. लेकिन विपक्ष अड़ा हुआ है और कार्यवाही में बाधा डाल रहा है. जो किसी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है, जो सांसद अपनी बात कहना चाहते हैं, वह नहीं हो रहा है, लोकतंत्र में इसे स्वस्थ लक्षण नहीं कहा जा सकता है.
BJP MP जनार्दन सिग्रीवाल ने कहा कि यह विपक्ष के अड़ियल रवैये को दिखाता है. खासकर कांग्रेस नहीं चाहती कि संसद चले. वे हमेशा किसी न किसी तरह से संसद को बाधित करने का मौका ढूंढते हैं. संसद में विपक्ष को चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए. लेकिन, विपक्ष को देश के विकास से कुछ भी लेना-देना नहीं है.
इसी बीच, जेपीएससी पेपर लीक मामले पर भी पक्ष और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी. BJP MP आदित्य साहू ने कहा कि कांग्रेस ने वहां चुप्पी साधे रखी है क्योंकि Jharkhand Government उनके समर्थन से चल रही है. आप देख सकते हैं कि हमारे हजारों छात्र खुले आसमान के नीचे बैठे कितनी तकलीफ झेल रहे हैं. उनके पास ठीक से खाना भी नहीं है और लोग जो कुछ भी थोड़ा-बहुत है, उसी से गुजारा करने को मजबूर हैं. इससे राज्य Government की हालत का पता चलता है. कांग्रेस इस Government का समर्थन कर रही है, जबकि छात्रों को बेसहारा छोड़ दिया गया है.
Samajwadi Party सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि अगर कुछ गलत हुआ है तो ऐसा नहीं होना चाहिए. देखिए, वहां कांग्रेस की Government है. अगर कुछ गलत हो रहा है, तो सिर्फ विरोध करना ही समाधान नहीं है. इस मुद्दे पर बातचीत होनी चाहिए. गलत काम गलत ही होता है, चाहे इसके लिए कोई भी जिम्मेदार हो, और जवाबदेही तय की जानी चाहिए. मैं कांग्रेस Government का बचाव नहीं कर रहा हूं, लेकिन जो भी पेपर लीक के दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए.
उन्होंने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने पर कहा कि यह एक कानूनी मामला है और मेरा मानना है कि कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है. मुझे लगता है कि हमारे खिलाड़ी सम्मान के हकदार हैं. कोई भी अपनी राय रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी कही हर बात सच हो. कोई व्यक्ति चाहे किसी भी पद पर हो, उसे अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए, सच और झूठ के बीच का अंतर समझना चाहिए और सच का साथ देना चाहिए.
दूसरी ओर, निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के मदरसों को लेकर दिए बयान पर सपा सांसद इकरा हसन ने कहा कि सबसे पहले तो हम यह जानना चाहते हैं कि उन्हें ऐसी बातें कहने का अधिकार किसने दिया है? दूसरी बात, किसी को भी India की विविधता के बारे में इस तरह की बातें कहने का अधिकार नहीं है. उन्हें अपने बारे में बात करनी चाहिए और अपनी सीमा में रहना चाहिए. यह देश उनसे पहले रहा है और उनके बाद भी रहेगा. वह इस देश की नहीं हैं, उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए. मदरसों पर उंगली उठाने वाली वह कौन होती हैं? मदरसों से कई स्कॉलर बाहर निकले हैं. अभी भी अफगानिस्तान से लोग आए थे तो दारुल उलूम देवबंद भेजा गया था. देश में विभिन्न धर्म के लोग हैं और सभी को अपने कल्चर के हिसाब से आगे बढ़ाने का अधिकार है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि डोनेशन का मुद्दा देश भर के लोगों से जुड़ा है. वे इसे अपनी आस्था से गहराई से जुड़ा हुआ मामला मानते हैं और इस पर चर्चा होनी चाहिए. आस्था से लोग आए थे, भाजपा राम के नाम पर चोरी करती है. राजनीति भाजपा करती थी. 40 प्रतिशत की कमीशन खोरी मंदिर निर्माण में किया. हजारों करोड़ों रुपए की चंदा चोरी हुई, कोई कार्रवाई नहीं हो रही है.
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डीकेएम/एबीएम
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