विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित

New Delhi, 20 जुलाई . Lok Sabha की कार्यवाही Monday को दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई क्योंकि पीठासीन अधिकारी के बार-बार आग्रह के बावजूद विपक्ष ने नारेबाजी बंद नहीं की. Monday को सदन की कार्यवाही सातवीं बार स्थगित करनी पड़ी.

संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन Monday को जब सदन की बैठक शुरू हुई, तो कार्यवाही के दौरान विपक्ष की तरफ से भारी हंगामा और लगातार नारेबाजी होती रही.

पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों से सदन की मर्यादा बनाए रखने का आग्रह किया लेकिन सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी.

इससे पहले, पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदन में व्यवस्था बनाने की कोशिश की लेकिन शोर-शराबा कम नहीं हुआ.

सैकिया ने सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने का आग्रह किया ताकि Lok Sabha सुचारू रूप से चल सके और देश को प्रभावित करने वाले ‘महत्वपूर्ण मुद्दों’ पर चर्चा के लिए शून्य काल शुरू किया जा सके.

पीठासीन अधिकारी ने पूछा, “यह व्यवहार लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है… क्या आप नहीं चाहते कि सदन चले?”

हालांकि, विपक्ष ने सदन के बीचोंबीच (वेल में) नारेबाजी और हंगामा जारी रखा. आखिरकार, Lok Sabha की कार्यवाही दोपहर 1 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

सदन की कार्यवाही पहले दोपहर तक के लिए स्थगित की गई थी. दोपहर में दोबारा बैठक शुरू होने पर कार्यवाही केवल सात मिनट तक चली और विपक्ष की भारी नारेबाजी के बीच Lok Sabha को फिर से स्थगित करना पड़ा. Lok Sabha की कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

इससे पहले, स्पीकर ओम बिरला ने दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि देकर सदन की कार्यवाही शुरू की. इसके तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में हंगामा मच गया.

स्पीकर बिरला ने शांति बनाए रखने की अपील दोहराई और कहा, “संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी को बोलने का समय दिया जाएगा.”

Prime Minister Narendra Modi ने संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, संसद के सुचारू कामकाज, सार्थक चर्चा और देश को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प को सुनिश्चित करने के लिए India को अनुभवी सांसदों के ज्ञान की आवश्यकता है.

Prime Minister ने सांसदों से उत्पादक बहस में शामिल होने और यह सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया कि ‘हर आवाज को मौका मिले’.

उन्होंने कहा, “जब तर्क और सबूत मजबूत हों, तो कोई भी शांत रहकर भी अपनी बात असरदार ढंग से कह सकता है. मुझे उम्मीद है कि सदन में होने वाली चर्चाओं को ऐसे तर्कों और सबूतों से फायदा मिलेगा. हर आवाज को सुने जाने का मौका मिले और हर विचार का उचित सम्मान हो. मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं कि वे सदन की कार्यवाही में पूरे मन से हिस्सा लें.”

एएसएच/पीएम