UPI पर बढ़ रहा लोड, डिजिटल बैंकिंग फेल होने की घटनाएं बढ़ेंगी

कुछ महीनों से इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग फेल होने की घटनाएं बढ़ी हैं. आगामी महीनों में देश के बैंकिंग सिस्टम की यह दिक्कत गहरा सकती है. देश के सबसे लोकप्रिय मोबाइल-पेमेंट गेटवे यूपीआई पर ट्रांजैक्शन का लोड लगातार बढ़ रहा है, जिसे बैंकों ने इस समस्या की जड़ बताया है. देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिए जाने का सीधा असर यूपीआई पर हुआ है. 2020-21 के दौरान अर्थव्यवस्था में 8% गिरावट आई थी, फिर भी 2,230 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. इसके मुकाबले आईएमपीएस, एनईएफटी, आरटीजीएस, एटीएम, प्वाइंट ऑफ सेल और चेक जैसे अन्य तमाम पेमेंट मोड के जरिए करीब 2,000 करोड़ लेनदेन हुए.

कोर बैंकिंग सिस्टम की अपनी सीमा

एक फिनटेक इन्वेस्टमेंट फर्म के मैनेजिंग पार्टनर ने कहा, कोर बैंकिंग सिस्टम (सीबीएस) का ढांचा छोटे-छोटे पेमेंट को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किया गया था. डिजिटल पेमेंट के मामले में तो आप करोड़ों ट्रांसजैक्शंस प्रोसेस करने के लिए सर्वस की संख्या बढ़ा सकते हैं, लेकिन इससे सीबीएस आर्किटेक्चर में कोई बदलाव नहीं होगा.

लिमिट क्रॉस कर रहा सर्वर का लोड बैलेंसर

आईबीएम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अमीत सिंह ने बताया कि डिजिटल बैंकिंग के सर्वर जिस डेटा सेंटर से जुड़े होते हैं, उसकी अपनी लिमिट होती है. ट्रांजैक्शन बढ़ने पर यह लिमिट क्रॉस हो जाती है लोड बैलेंसर फेल हो जाता है. ऐसे में ट्रांजैक्शन फेल हो जाते हैं. ऐसी समस्या से बचने के लिए सर्वर इन्फ्रा मजबूत करना होगा.

बैंकों ने यूपीआई पर डाली जिम्मेदारी

पिछले कुछ महीनों में सबसे बड़े सरकारी बैंक (Bank) एसबीआई और सबसे बड़े प्राइवेट बैंक (Bank) एचडीएफसी के ग्राहकों को कई बार मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग फेल से जूझना पड़ा. इन बैंकों ने इसकी जिम्मेदारी यूपीआई पर डाली है. दलील है 3 साल में डिजिटल ट्रांजैक्शन दोगुना (guna) बढ़ गए, जिन्हें हैंडल करना आसान नहीं है.

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