नन्हे हाथों ने जारी किया विवाह योग्य युवतियों  के लिए मेहंदी का एक आकर्षक डिजाइन

उदयपुर (Udaipur). कहते हैं हुनर जन्मजात होता है और उसका सदुपयोग किया जाए तो वह इंसान को स्वावलंबी आत्मनिर्भर बनने में भी सहायक होता है ऐसा ही कारनामा प्रतिदिन कर रही है उदयपुर (Udaipur) के गायत्री मार्ग में रहने वाली नाबालिग बच्ची वैभवी शर्मा ऑफ गुनगुन. बालिका वैभव यही ना केवल चित्रकला पेंटिंग के साथ बल्कि मेहंदी बनाने के विधिवत प्रशिक्षण को प्राप्त कर अपने हुनर को चार चांद लगा रही है. नाबालिक गुनगुन शर्मा ने अक्षय तृतीया पर विवाह में बंधने वाली युवतियों एवं शुक्रवार (Friday) को ईद मना रही महिलाओं व युवतियों के लिए मेहंदी का एक डिजाइन जारी किया.

अमल का कांटा गायत्री मार्ग निवासी भारती शर्मा बचपन से ही स्केच पेंटिंग पोस्टर के साथ मेहंदी लगाने के कार्य में प्रशिक्षित है तथा शैक्षणिक क्षेत्र में बीएड व नर्सरी टीचर्स ट्रेनिंग करने वालों छात्र (student) छात्राओं को अपने प्रायोगिक परीक्षण की काउंसलिंग कर उन्हें दिशा निर्देश के साथ छात्र (student) छात्राओं को पढ़ाने में सहायक पोस्टर पेंटिंग स्केच आदि का प्रशिक्षण देती है.

भारती शर्मा के इस हुनर से बाल्यकाल से जुड़ी उनकी पुत्री वैभवी शर्मा उर्फ गुनगुन शर्मा लगातार उन्हें देख रही और ऑब्जर्वर कर रही थी और अचानक जब खाली कैनवास पर उसने रंग स्केल वह पेंसिल का उपयोग शुरू किया तो वह आशा से अधिक अच्छे चित्र पोस्टर बनाने लगी बालिका वैभवी के इस हुनर को देखकर भारतीय शर्मा ने उसे चित्रकला पोस्टर स्केच के प्रशिक्षण के साथ मेहंदी लगाने का भी हुनर देना शुरू किया और अपने तीज त्योहार वह घर परिवार में पारंपरिक रूप पर आने वाले दिवस में परिवार जन भारती के साथ उसकी पुत्री से भी मेहंदी लगवाने का काम लेने लगे इसका परिणाम यह हुआ कि नाबालिग बच्ची इस हुनर को अल्प अवस्था में ही विधिवत रूप से सीखने लगी.

शुक्रवार (Friday) को नाबालिक वैभवी शर्मा ने अक्षय तृतीया पर होने वाले सावो के लिए मेहंदी का एक डिज़ाइन बनाया और उसे विवाह में बंधने वाली वधू के लिए सोशल साइट वह अन्य माध्यमों से जारी किया जिसे लोगों ने काफी सराहा बालिका के इस हुनर से निश्चय ही है कि सरकार की गाइडलाइन की बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा.

वैभवी की मम्मी भारती शर्मा का कहना है पिछले 1 साल से कोरोना संक्रमण को लेकर चल रहे लॉकडाउन (Lockdown) के कारण बच्चों में रचनात्मक गतिविधि के प्रति उत्साह को देखकर उसे समय-समय पर इन विधाओं की बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है ताकि आगे चलकर या इसे जीवन उपार्जन का साधन बनाकर स्वावलंबी आत्मनिर्भर बन सकें.

2021-05-15
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