एनडीए की तरह आरआईएमसी और आरएमएस में भी दाखिला ले सकेगी लड़कियां

नई दिल्ली (New Delhi) . एनडीए की तरह आरआईएमसी और आरएमएस वे संस्थान रहे हैं, जहां पर केवल लड़कों को शामिल किया जाता रहा है.लेकिन मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से कहा है कि लड़कियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के अलावा राष्ट्रीय भारतीय सैन्य कॉलेज और देश के पांच राष्ट्रीय सैन्य स्कूलों में भी दाखिला मिलेगा. केंद्र ने इससे जुड़ा हलफनामा सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में 6 अक्टूबर को सौंपा. केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा, शैक्षणिक सत्र 2022-23 से आवश्यक ढांचागत और तार्किक परिवर्तन लाए जाएंगे. इसके बाद आरआईएमसी और आरएमएस में लड़कियों को शामिल किया जाएगा. देहरादून (Dehradun) में आरआईएमसी के लिए, हलफनामे में बताया 11.5 से 13 वर्ष की आयु के छात्र (student) अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षा पास करने के बाद संस्थान में प्रवेश ले सकते है.

मोदी सरकार ने हलफनामे में कहा कि वह जनवरी 2023 से हर छह महीने में 5 लड़कियों को शामिल करना शुरू कर देगी, इसके लिए लड़कियों को जून 2022 में प्रवेश परीक्षा देने की अनुमति होगी. केंद्र ने अपनी योजना के पहले चरण के बारे में बताकर कहा कि इसमें हर साल 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. यह वृद्धि कुछ बुनियादी ढांचों पर भी असर डालेगी. लड़कियों को जनवरी 2028 से शुरू होने वाले कार्यकाल के लिए आरआईएमसी में प्रवेश के लिए जून 2027 में निर्धारित प्रवेश परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी.सरकार ने कहा, बालिका कैडेटों के लिए उपयुक्त चिकित्सा मानकों और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अलावा, गोपनीयता, सुरक्षा प्रदान करने के लिए व्यवस्था में कई अन्य संशोधन और पुनर्गठन करना होगा. अधिकारियों का एक बोर्ड सभी प्रासंगिक मुद्दों की जांच कर रहा है ताकि लड़कियों के अनुकूल बुनियादी ढांचे को बदला जा सके.
नीट-सुपर स्पेशलिटी परीक्षा के पैटर्न में किए गए बदलाव अगले सत्र में लागू किए जाएंगे
नई दिल्ली (New Delhi) . विशेषज्ञता पाठ्यक्रमों की तैयारी में लगे हजारों युवा डॉक्टरों (Doctors) को राहत देकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) को सूचित किया कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखकर नीट-सुपर स्पेशलिटी परीक्षा के पैटर्न में किए गए बदलाव अब अकादमिक सत्र 2022-23 से लागू किए जाएंगे.सरकार ने संकेत दिया कि वह 2021-22 शैक्षणिक सत्र की परीक्षा को कुछ महीने के लिए टाल सकती है, क्योंकि समूची प्रक्रिया की शुरुआत नए सिरे से करनी होगी. शीर्ष अदालत उन 41 स्नातकोत्तर चिकित्सकों और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने 13 और 14 नवंबर को होने वाली परीक्षा के लिए 23 जुलाई को अधिसूचना जारी होने के बाद पाठ्यक्रम में अंतिम क्षणों में किए गए बदलाव को चुनौती दी थी.

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमू्र्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों को रिकॉर्ड में रखकर नीट-सुपर स्पेशलिटी के परीक्षा पैटर्न में बदलावों को इस वर्ष से लागू करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निस्तारण कर दिया.भाटी ने कहा, छात्रों के हित में, जिन्होंने पुरानी व्यवस्था के अनुसार तैयारी की है, सरकार ने दो विशेषज्ञ इकाइयों (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड के साथ विमर्श कर निर्णय किया है कि नीट-सुपरस्पेशलिटी की संशोधित योजना 2022 से क्रियान्वित की जाएगी. संक्षिप्त सुनवाई के दौरान भाटी ने कहा कि वह शीर्ष अदालत द्वारा व्यक्त की गई आशंका को दूर करना चाहती हैं.

पीठ ने भाटी से कहा कि वह यह मुद्दा उस पर छोड़ दें.भाटी ने कहा कि अधिकारियों को नवंबर में होने वाली परीक्षा को कुछ महीने के लिए टालने की जरूरत हो सकती है, क्योंकि अब समूची प्रक्रिया को बदले जाने की आवश्यकता है. पीठ ने कहा कि सरकार ने बहुत अच्छी तरह काम किया है और परीक्षा कब कराई जाए, यह अधिकारियों पर निर्भर है, लेकिन निश्चित तौर पर इस साल.

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