दिल्ली में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणालियों की मरम्मत के निर्देश, एलजी ने तय की समयसीमा

New Delhi, 11 जून . दिल्ली के उपGovernor टी.एस. संधू ने Thursday को मानसून से पहले राजधानी की सभी वर्षा जल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियों को चालू करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के प्रयास तेज करने को कहा.

संधू ने सभी नागरिक एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर पाइपलाइन, गटर और भंडारण टैंकों की मरम्मत समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए. उन्होंने विशेष रूप से सरकारी स्कूलों और सरकारी इमारतों में स्थापित वर्षा जल संचयन संरचनाओं पर ध्यान देने को कहा.

उपGovernor ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज डीडीए, एमसीडी और एनडीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राजधानी में वर्षा जल संचयन की तैयारियों की समीक्षा की.”

उन्होंने कहा, “संरचनात्मक मरम्मत में तेजी लाने और मानसून से पहले सभी वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश और सख्त समयसीमा तय की गई है.”

संधू ने कहा कि अधिकारियों को दिल्ली में स्थापित सभी वर्षा जल संचयन संरचनाओं की कुल क्षमता का व्यापक आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य की योजना, भूजल पुनर्भरण और दीर्घकालिक जल संरक्षण प्रयासों के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके.

इससे पहले दिल्ली की Chief Minister रेखा गुप्ता ने कहा था कि राजधानी के 75 सीएम श्री स्कूलों में पहले से मौजूद वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पुनर्जीवित कर फिर से चालू किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि इस पहल से प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ लीटर वर्षा जल संचयन क्षमता विकसित होने की उम्मीद है.

Chief Minister ने बताया कि स्कूलों में वर्षा जल संचयन के लिए Government ‘एहसास’ मॉडल अपनाएगी. वर्ष 2021 में दिल्ली जल बोर्ड से स्वीकृत यह मॉडल कम लागत, कम जगह की आवश्यकता और लगभग शून्य रखरखाव के लिए जाना जाता है.

इस प्रणाली के तहत छतों से एकत्रित वर्षा जल को फिल्टर कर भंडारण इकाइयों और बोरवेल से जोड़ा जाएगा, जिससे भूजल पुनर्भरण होगा और सूखे बोरवेल भी दोबारा सक्रिय हो सकेंगे.

Chief Minister के अनुसार, तकनीकी टीमों ने सभी 75 स्कूलों का निरीक्षण पूरा कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है.

ऑडिट में पाया गया कि अधिकांश स्कूलों में वर्षा जल संचयन प्रणालियां पहले से मौजूद थीं, लेकिन कई वर्षों से वे बंद पड़ी थीं या उनका उचित रखरखाव नहीं किया गया था.

कई संचयन गड्ढे पूरी तरह जाम पाए गए, जबकि कई में प्लास्टिक कचरा, गाद, मलबा और अन्य कचरा भरा हुआ था. कुछ मामलों में स्कूल प्रशासन को यह तक जानकारी नहीं थी कि परिसर में ऐसी संरचनाएं मौजूद हैं.

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर वर्षा जल सीधे नालियों में बह रहा था, जिससे जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा था. बयान के अनुसार, कई संरचनाओं में डिजाइन संबंधी कमियां भी पाई गईं.

डीएससी