
तिरुवनंतपुरम, 24 जून . लगभग एक दशक बाद केरल की सड़कों पर एक बार फिर माकपा के युवा और छात्र संगठनों की सक्रियता दिखाई दी. वामपंथी युवा संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) और छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने Wednesday को कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ Government के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन किए, जिनके दौरान कई स्थानों पर Police के साथ झड़पें भी हुईं.
वर्ष 2016 से पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के सत्ता में रहने के कारण माकपा का पारंपरिक आंदोलनकारी तंत्र लंबे समय से शांत था, लेकिन मई में हुए विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की जीत और वी.डी. सतीशन के Chief Minister बनने के बाद वामपंथी संगठनों ने फिर से सड़कों पर उतरना शुरू कर दिया है.
Wednesday को राज्यभर में डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं ने यूडीएफ Government पर शराब कंपनियों को कर में रियायत देने के फैसले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए. कई जगहों पर Police ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछारें कीं और लाठीचार्ज का सहारा लिया.
ये प्रदर्शन माकपा राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व वाली पार्टी राज्य सचिवालय द्वारा जारी बयान के बाद आयोजित किए गए थे. मई में हार के बाद यह डीवाईएफआई का पहला समन्वित राज्यव्यापी आंदोलन माना जा रहा है.
उधर, एसएफआई कार्यकर्ताओं ने सहकारी शिक्षण संस्थानों में फीस वृद्धि के विरोध में राज्य सचिवालय तक मार्च निकाला. इस दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई. आरोप है कि डीवाईएफआई और एसएफआई कार्यकर्ताओं ने Chief Minister सतीशन और कांग्रेस समर्थित संगठनों के नेताओं की तस्वीरों वाले होर्डिंग्स और फ्लेक्स बोर्डों को नुकसान पहुंचाया.
Political पर्यवेक्षकों का मानना है कि Wednesday का प्रदर्शन विपक्ष के रूप में माकपा के आक्रामक अभियान की शुरुआत का संकेत है. 18 मई को यूडीएफ Government के सत्ता संभालने के बाद से ही वामपंथी दल Government के फैसलों और बजट पर लगातार नजर रखे हुए हैं.
डीवाईएफआई की सड़कों पर वापसी के साथ उसके कुछ पुराने उग्र आंदोलनों की यादें भी ताजा हो गई हैं. इनमें सबसे चर्चित वह घटना थी, जब Enforcement Directorate (ईडी) ने पिनराई विजयन की बेटी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान विपक्ष के नेता के किराये के मकान पर छापेमारी की थी. उस समय वहां से लौट रहे अधिकारियों पर वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हमला कर दिया था, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं.
हालांकि Wednesday के प्रदर्शन उस स्तर तक नहीं पहुंचे, लेकिन Political रूप से उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि दस वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद माकपा अब विपक्ष की भूमिका में लौट आई है और उसके साथ ही सड़क की राजनीति भी फिर से सक्रिय हो गई है.
–
डीएससी
Skip to content