महाराष्ट्र: कन्नड़ माध्यम के शिक्षकों के लिए टीईटी में मराठी भाषा अनिवार्य करने पर केवीएस का विरोध

Mumbai , 13 जुलाई . Maharashtra Government की ओर से कन्नड़-मीडियम के शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा में मराठी भाषा अनिवार्य करने पर कर्नाटक विद्यावर्धक संघ (केवीएस) ने विरोध किया है. संगठन का आरोप है कि यह कदम एनसीटीई के नियमों का उल्लंघन है और इसका मकसद Maharashtra के सीमावर्ती इलाकों में कन्नड़ शिक्षा को कमजोर करना है.

संगठन की स्पेशल एग्जीक्यूटिव कमेटी ने एक प्रस्ताव पास किया है, जिसमें इस फैसले को भेदभावपूर्ण और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया गया है. इसके साथ ही, यह भी बताया गया है कि कर्नाटक में मराठी-मीडियम के शिक्षकों को मराठी में टीईटी परीक्षा देने की इजाजत है और मांग की गई है कि Maharashtra भी कन्नड़ शिक्षकों के लिए यही मॉडल अपनाए.

केवीएस ने Maharashtra पर यह आरोप भी लगाया गया है कि वह कन्नड़ शिक्षकों को मराठी में परीक्षा देने के लिए मजबूर करके कन्नड़ भाषा को दबाने की कोशिश कर रहा है. केवीएस का कहना है कि कन्नड़ शिक्षकों को राहत देने के कर्नाटक Government के प्रस्ताव को Maharashtra ने नजरअंदाज कर दिया है.

सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर Maharashtra Government ने तुरंत यह फैसला वापस नहीं लिया तो वे जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन करेंगे. केवीएस ने Chief Minister डी.के. शिवकुमार से आग्रह किया है कि वे Maharashtra के Chief Minister के साथ इस मुद्दे पर बात करें और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत दखल देने की अपील की है.

Maharashtra में मराठी भाषा अनिवार्य करने को लेकर भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने बीते दिन कहा था कि अगर आप Maharashtra में रहते हैं, तो मराठी जानना जरूरी है; आपको यह भाषा आनी चाहिए. स्थानीय भाषा में महारत होने से कामकाज आसान हो जाता है और लोगों के साथ बेहतर ढंग से बातचीत की जा सकती है. इसलिए, मैं मराठी सिखाने और सीखने की पहल का स्वागत करता हूं.”

मराठी भाषा को लेकर रेलवे यात्री और टिकट परीक्षक (टीटीई) के बीच हुए विवाद पर एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, “Maharashtra में रहने वाले लोगों को मराठी बोलनी चाहिए, या कम से कम इसे सीखने की कोशिश करनी चाहिए. लेकिन अगर कोई व्यक्ति केंद्र Government का कर्मचारी है, तो उन पर ऐसी कोई सख्त शर्त नहीं लगाई जा सकती क्योंकि उनका चयन अखिल भारतीय चयन प्रक्रिया के आधार पर होता है; वे किसी एक खास राज्य से नहीं आते हैं.”

एसडी/पीएम