
कोलकाता, 23 मई . साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी पूर्व Chief Minister ममता बनर्जी की डिजाइन की गई एक विवादित फुटबॉल मूर्ति को तोड़ दिया गया है. मूर्ति का टूटना राज्य की राजनीति और खेल जगत दोनों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है.
Saturday सुबह जब लोग स्टेडियम पहुंचे तो प्रतिमा टूटी हुई मिली. इसके बाद social media पर इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं. कुछ लोगों ने इसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत बताया. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इससे स्टेडियम की पुरानी पहचान खत्म हो गई.
प्रतिमा को लेकर शुरू से मतभेद रहे हैं. जनता का एक वर्ग इसे आधुनिक कला का नमूना मानता है, तो फुटबॉल प्रशंसकों के एक वर्ग का मानना है कि देश के सबसे बड़े फुटबॉल स्टेडियमों में से एक के बाहर ऐसी प्रतिमा उपयुक्त नहीं लगती.
मामले ने Political रंग भी ले लिया है. भारतीय जनता पार्टी नेता कीया घोष ने social media पर कहा कि जिस संरचना को हटाने की बात पहले कही गई थी, उसे अब तोड़ दिया गया है. पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने हाल ही में कहा था कि यह प्रतिमा स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है. Government इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की योजना पर काम कर रही है.
मूर्ति तृणमूल कांग्रेस Government के दौरान बनी थी और ममता बनर्जी द्वारा डिजाइन की गई थी. इस वजह से मूर्ति टूटने के बाद तृणमूल कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन उग्र हो सकता है.
यह प्रतिमा साल 2017 में फीफा अंडर-17 विश्व कप से पहले लगाई गई थी. इसमें धड़ से कटे हुए दो पैर और उनके ऊपर एक फुटबॉल रखी हुई दिखाई देती थी. साथ ही इस पर ‘बिश्वा बांग्ला’ का लोगो भी लगा हुआ था. प्रतिमा स्टेडियम के वीवीआईपी गेट के पास स्थापित थी. मूर्ति को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी Government) का प्रतीक भी माना जाता रहा है.
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पीएके
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