
तिरुवनंतपुरम, 22 अप्रैल . केरल के त्रिशूर में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण हादसे के बाद राज्य की पहली महिला पूर्व Police महानिदेशक (डीजीपी) से नेता बनीं आर. श्रीलेखा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और आतिशबाजी आधारित परंपराओं की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
social media पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए आर. श्रीलेखा ने इस हादसे में 13 लोगों की मौत पर गहरा दुख जताया. उन्होंने सवाल किया कि क्या Police और फायर एंड रेस्क्यू विभाग को इस तरह की आतिशबाजी इकाई के संचालन की जानकारी थी और क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए थे.
उन्होंने यह भी पूछा कि त्रिशूर में इस तरह की कितनी आतिशबाजी इकाइयां संचालित हो रही हैं और उनमें से कितनी सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं. प्रशासन पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि क्या अधिकारी इन सबकी जांच के लिए समय निकालते हैं या फिर वे राजनीति में व्यस्त रहते हैं.
पूर्व डीजीपी ने मुद्दे को व्यापक बनाते हुए मंदिर उत्सवों में आतिशबाजी की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े किए. उनके मुताबिक, ऐसी परंपराएं न केवल मानव जीवन को खतरे में डालती हैं, बल्कि हाथियों जैसे जानवरों को भी अत्यधिक शारीरिक और मानसिक कष्ट देती हैं, जिन्हें घंटों शोर और गर्मी के बीच खड़ा रहना पड़ता है.
उन्होंने कहा, “हमें ऐसे उत्सवों की क्या जरूरत है जो आग से खेलते हैं और लोगों की जान जोखिम में डालते हैं? हाथियों को इस तरह परेशान क्यों किया जाए?”
समाज से आत्ममंथन की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में इन परंपराओं पर पुनर्विचार करने की जरूरत है. उनका मानना है कि मंदिरों में पूजा, अनुष्ठान और भक्ति को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जबकि खतरनाक तत्वों जैसे आतिशबाजी से दूर रहना चाहिए.
उनकी इन टिप्पणियों के बाद केरल में त्योहारों के दौरान सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और पशु कल्याण को लेकर बहस तेज हो गई है.
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डीएससी
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