केरल हाईकोर्ट ने रीना तबादला मामले में सरकार के फैसले को सही ठहराया, मंत्री मुरलीधरन को मिली राहत

कोच्चि, 23 जून . केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन को Tuesday को एक बड़ी प्रशासनिक जीत मिली. केरल हाईकोर्ट ने डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीएचएस) में हुए तबादला विवाद में रीना के ट्रांसफर के Government के फैसले को सही ठहराया और केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया.

यह फैसला मुरलीधरन के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि हेल्थ डिपार्टमेंट का कामकाज संभालने के तुरंत बाद ही यह विवाद उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था.

हाई कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए मुरलीधरन ने कहा कि वह तुरंत कार्रवाई में विश्वास रखते हैं और अपने विभाग के किसी भी अधिकारी को ऐसा कोई काम नहीं करने देंगे, जिससे Government की बदनामी हो.

उन्होंने जोर देकर कहा, “जब तक मैं इस पद पर हूं, मेरे विभाग का कोई भी अधिकारी ऐसा कुछ नहीं करेगा, जिससे Government की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे.”

यह विवाद रीना के तबादले के सरकारी फैसले को लेकर था, जिसे एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में चुनौती दी गई थी. ट्रिब्यूनल ने पहले तबादले के आदेश पर सवाल उठाते हुए राहत दी थी.

इसके बाद Government हाई कोर्ट गई, जिसने अब Government के फैसले को सही ठहराया है.

सरकारी हलकों में इस फैसले को हेल्थ डिपार्टमेंट में तबादलों और पोस्टिंग को लेकर प्रशासन के अधिकार की पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है. यह विभाग एक अहम हिस्सा है, जहां नौकरशाही के फैसले अक्सर Political रूप से संवेदनशील हो जाते हैं.

हेल्थ डिपार्टमेंट पर कड़ी नजर रखी जाती रही है, क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारियों और इस सेक्टर के जन-महत्व के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले अक्सर विवाद का कारण बनते हैं.

अपने मजबूत Political अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले मुरलीधरन ने संकेत दिया है कि प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा.

हाई कोर्ट का फैसला मंत्री को यह दिखाने का मौका भी देता है कि Government के प्रशासनिक फैसलों को कानूनी समर्थन प्राप्त है, साथ ही यह विभाग के तंत्र को आधिकारिक प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने का संदेश भी देता है.

एससीएच/एबीएम