
कोच्चि, 3 अगस्त . केरल हाईकोर्ट ने Monday को सीपीआई (एम) के 9 कार्यकर्ताओं को सशर्त जमानत दे दी. इन सभी को मसाप्पाडी मामले की जांच के दौरान ईडी अधिकारियों पर कथित तौर पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. यह सभी आरोपी दो महीने तक न्यायिक हिरासत में थे.
जस्टिस कौसर एडप्पागाथ ने किरण पी.एस., जीवन, अनिल कुमार, श्रीजीत, निशाद, सिद्दार्थ एस., शेफ़ीक, नंदू जी.आर. और राहुल ए. राजन की जमानत याचिका स्वीकार कर ली. उन्होंने कहा कि यह सभी आरोपी 67 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहे. साथ ही, इन सभी लोगों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रही और जांच भी लगभग खत्म ही हो चुकी है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर Tuesday को विचार किया जाएगा. वहीं, कोर्ट ने जमानत देते हुए यह स्पष्ट किया कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जिन्हे किसी भी सूरत में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता है.
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अभियोजन पक्ष में पहली नजर में हत्या के प्रयास के आरोपों की पुष्टि करने में विफल रहा, जिसे अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा सकता है.
यह पूरा मामला 27 मई की उस हिंसा से जुड़ा हुआ है, जब ईडी अधिकारी नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन और उनकी बेटी के आवास से छापेमारी करके लौट रहे थे. ईडी अधिकारियों ने यह छापेमारी मासप्पाडी मामले में की थी.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, करीब 300 लोगों ने ईडी अधिकारियों को घेर लिया था. उनकी गाड़ियों को रोक दिया था और उन पर पत्थर, ईंटे, लाठी और लोहे की रॉड से भी हमला किया था. इतना ही नहीं, ईडी अधिकारियों पर हमले किए गए और उनकी गाड़ियों को क्षति पहुंचाई गई. इसमें सीआरपीएफ और Police अधिकारी भी शामिल थे.
Police ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने का अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था, जिसमें हत्या के प्रयास से जुड़ा आरोप भी शामिल था.
ईडी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह घटना स्वत:स्फूर्त प्रदर्शन नहीं था, बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई में बाधा पहुंचाने के मकसद से किया गया पूर्व नियोजित हमला था. यह हमला पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से किया गया था, ताकि अधिकारियों को डराया धमकाया जा सके.
ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर सनथ रेड्डी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि सभी आरोपी जानलेवा हथियारों के साथ एकत्रित थे. इन लोगों ने आधिकारिक वाहनों का रास्ता रोका, नारे लगाए और ईडी अधिकारियों को मारने तक की बात कही. इतना ही नहीं, इन उग्र लोगों ने अधिकरियों पर पथराव करने के साथ ही सरकारी वाहनों को भी क्षति पहुंचाई.
ईडी ने आगे दलील देते हुए कहा कि छापेमारी और हमले के बीच के अंतराल से यह साफ जाहिर होता है कि पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को लामबंद करने का पर्याप्त समय बचा था, ताकि हमले को अंजाम दिया जा सके. यह भी दावा किया गया कि जांच एजेंसी के पास इस संबंध वीडियो सबूत मौजूद हैं, जिससे आरोपियों के समन्वित गतिविधियों के बारे में पता चलता है. हालांकि, मामले की जांच अभी-भी जारी है.
हाईकोर्ट ने कई मुख्य बातों को ध्यान में रखते हुए आरोपियों को जमानत प्रदान की है, जिसमें प्रमुख रूप से लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रहना, जांच का पूरा होना और किसी भी प्रकार की आपराधिक पृष्ठभूमि का नहीं होना, जैसे बिंदु शामिल हैं.
वहीं, कोर्ट ने टिप्पणी की कि हत्या के प्रयास का आरोप अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर सकता है. हालांकि, बाकी के आरोपों की जांच जारी रहेगी.
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एसएचके/एएस
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