असम का काजीरंगा बना शिकारी पक्षियों और सारसों का प्रमुख आश्रय स्थल, सर्वे में सामने आई समृद्ध जैव विविधता

गुवाहाटी, 6 जून . असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व (केएनपीटीआर) में हुए नवीनतम पक्षी सर्वेक्षण में 30 प्रजातियों के शिकारी पक्षियों (रैप्टर्स) के 217 और छह प्रजातियों के सारसों (स्टॉर्क) के 266 पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है. यह सर्वे काजीरंगा की समृद्ध पक्षी जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण में उसकी वैश्विक महत्ता को रेखांकित करता है.

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी इस सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी-मार्च 2026 के दौरान काजीरंगा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने असम के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों के सहयोग से यह व्यापक सर्वेक्षण कराया था.

केएनपीटीआर की निदेशक सोनाली घोष ने बताया कि सर्वेक्षण में 30 प्रजातियों के शिकारी पक्षियों के 217 और छह प्रजातियों के सारसों के 266 पक्षियों की पहचान की गई. यह सर्वे फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के पहले सप्ताह के बीच 10 विशेषज्ञ गणनाकारों की टीम द्वारा काजीरंगा के सभी वन्यजीव प्रभागों में किया गया.

उन्होंने बताया कि काजीरंगा में दिन और रात दोनों समय सक्रिय रहने वाले शिकारी पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें ईगल, फाल्कन, गिद्ध, बजर्ड और उल्लू शामिल हैं. वहीं, यहां के विस्तृत आर्द्रभूमि क्षेत्र स्थानीय और प्रवासी सारसों के लिए भी सुरक्षित आवास उपलब्ध कराते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, India में शिकारी पक्षियों की कुल 112 प्रजातियां दर्ज हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रजातियां काजीरंगा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पाई जाती हैं. वहीं, दुनिया में सारसों की 20 प्रजातियां हैं, जिनमें से आठ India में मिलती हैं और इन सभी आठ प्रजातियों की मौजूदगी असम तथा काजीरंगा क्षेत्र में दर्ज की गई है.

सर्वेक्षण में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सर्वाधिक 21 प्रजातियों के शिकारी पक्षी और पांच प्रजातियों के सारस पाए गए. इसके बाद बिस्वनाथ वन्यजीव प्रभाग में 20 शिकारी पक्षी और छह सारस प्रजातियां दर्ज की गईं, जबकि नगांव वन्यजीव प्रभाग में 14 शिकारी पक्षी और पांच सारस प्रजातियां पाई गईं.

सारसों में एशियन ओपनबिल सबसे अधिक संख्या में मिला, जिसकी 92 मौजूदगी दर्ज की गई, जबकि ग्रेटर एडजुटेंट सबसे दुर्लभ रहा और केवल तीन पक्षी ही दिखाई दिए. वहीं शिकारी पक्षियों में हिमालयन ग्रिफॉन गिद्ध सबसे अधिक 69 बार देखा गया, जबकि बूटेड ईगल और व्हाइट-टेल्ड ईगल की केवल एक-एक बार ही मौजूदगी दर्ज की गई.

रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त पलास फिश ईगल के संरक्षण में काजीरंगा की अहम भूमिका का भी उल्लेख किया गया है. मंगोलिया के वन्यजीव विज्ञान एवं संरक्षण केंद्र द्वारा टैग किया गया नर पलास फिश ईगल ‘इडर’ वर्ष 2020 से हर साल प्रजनन के लिए काजीरंगा लौट रहा है और गैर-प्रजनन मौसम में वापस मंगोलिया चला जाता है.

वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा 2020 में किए गए सर्वेक्षण में काजीरंगा में पलास फिश ईगल के 10 सक्रिय घोंसले दर्ज किए गए थे, जो दुनिया में इस प्रजाति के सबसे अधिक ज्ञात प्रजनन स्थलों में से एक है.

सोनाली घोष ने कहा कि इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष संकटग्रस्त शिकारी पक्षियों और सारसों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. इनमें से अधिकांश प्रजातियां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त करती हैं.

उन्होंने कहा कि यह सर्वे काजीरंगा के अनूठे पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित रखने की आवश्यकता को और मजबूत करता है, क्योंकि शिकारी पक्षी और सारस प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

गौरतलब है कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान India के प्रसिद्ध ‘बिग फाइव’ वन्यजीवों का भी घर है. यहां वर्तमान में 2,613 एक सींग वाले गैंडे, 104 बंगाल टाइगर, 1,228 एशियाई हाथी, 2,565 जंगली भैंसे और 1,129 पूर्वी दलदली हिरण पाए जाते हैं. यह अभयारण्य असम के गोलाघाट, नगांव, सोनितपुर और बिस्वनाथ जिलों में फैला हुआ है.

डीएससी