कर्नाटक: मंत्री कुमारस्वामी ने नदी-जोड़ो परियोजना पर सहमति को लेकर सीएम डीके शिवकुमार से किया सवाल

Bengaluru, 10 जुलाई . Union Minister एचडी कुमारस्वामी ने Friday को Chief Minister डीके शिवकुमार की आलोचना की. शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक ने कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना के लिए अपनी सहमति दे दी है.

कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि राज्य पानी में अपना हिस्सा तय होने से पहले ही ऐसी परियोजना के लिए कैसे सहमत हो सकता है.

Bengaluru में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि Chief Minister कर्नाटक के सिंचाई हितों से जुड़े बेहद अहम मामले पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं.

कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें सैद्धांतिक रूप में नदियों को जोड़ने से कोई आपत्ति नहीं है. इस परियोजना को निश्चित रूप से लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कर्नाटक की सहमति देने से पहले Government को यह पता लगाना चाहिए कि परियोजना के तहत राज्य को कितना पानी आवंटित किया गया है.

उन्होंने दावा किया कि Chief Minister को कर्नाटक के सिंचाई मुद्दों की पर्याप्त जानकारी नहीं है और उन्होंने तथ्यों को समझे बिना ही बयान दिए हैं.

कुमारस्वामी ने शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नदियों को जोड़ने और पानी के बंटवारे के मामलों को वैसे नहीं निपटाया जा सकता जैसे Bengaluru में रियल एस्टेट का कारोबार किया जाता है.

उन्होंने कहा कि अगर Chief Minister तकनीकी बारीकियों से अनजान थे, तो सार्वजनिक बयान देने से पहले उन्हें सिंचाई विशेषज्ञों, इंजीनियरों या कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी टीम से सलाह लेनी चाहिए थी.

बेलगावी में Chief Minister की हालिया टिप्पणी का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने इस बयान के आधार पर स्पष्टीकरण की मांग की.

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के जल संसाधनों से जुड़े मामलों में Chief Minister ‘बहुत ज्‍यादा उदार’ हो गए हैं. तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा तुंगभद्रा जलाशय के क्रेस्ट गेट्स के हालिया उद्घाटन का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने सवाल किया कि कर्नाटक पैसा क्यों खर्च कर रहा है, जबकि पड़ोसी राज्यों को पानी से फायदा होगा.

उन्होंने विपक्ष या कर्नाटक की जनता को बताए बिना तुंगभद्रा जलाशय से गाद हटाने (डिसिल्टिंग) के बारे में पड़ोसी राज्यों के साथ चर्चा करने की बात कहने के लिए भी Chief Minister की आलोचना की.

उन्होंने Chief Minister के उस कथित दावे पर भी आपत्ति जताई कि केंद्र Government नदी-जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेगी. कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें नदी-जोड़ो परियोजना से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन Government को पहले कर्नाटक को यह बताना होगा कि राज्य को असल में कितना पानी मिलेगा.

कुमारस्वामी ने कहा कि Chief Minister को पहले नदी-जोड़ो प्रस्ताव के इतिहास और मौजूदा स्थिति को समझना चाहिए.

उनके मुताबिक, 2023 में तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना के तहत 247 टीएमसी पानी के इस्तेमाल की योजना थी. उन्होंने दावा किया कि उस प्रस्ताव के तहत आंध्र प्रदेश को 90 टीएमसी पानी मिलना था, जबकि तेलंगाना और तमिलनाडु को 60-60 टीएमसी पानी आवंटित किया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में कर्नाटक को कोई पानी आवंटित नहीं किया गया था.

उन्होंने कहा कि पूर्व Prime Minister एचडी देवेगौड़ा की लगातार कोशिशों के बाद, कर्नाटक को बाद में मलाप्रभा नदी से 15 टीएमसी पानी आवंटित किया गया, लेकिन शर्त यह थी कि इसका इस्तेमाल सिर्फ पीने के पानी के लिए किया जाएगा.

कुमारस्वामी ने पूछा कि Chief Minister यह दावा कैसे कर सकते हैं कि कर्नाटक इस परियोजना का समर्थन करता है और 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार है, और उन्होंने किस आधार पर यह बयान दिया है.

Union Minister ने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक की सहमति की घोषणा से पहले केंद्रीय जल आयोग या राष्ट्रीय जल बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी.

एएसएच/