
Bengaluru, 27 अप्रैल . मंगलुरु कुकर बम ब्लास्ट मामले में विशेष एनआईए अदालत के फैसले से पहले कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने Monday को कहा कि उन्हें निष्पक्ष निर्णय की उम्मीद है और Government अदालत के फैसले के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी.
Bengaluru में पत्रकारों से बातचीत करते हुए परमेश्वर ने कहा कि अदालत आज इस मामले में फैसला सुना सकती है. उन्होंने कहा, “Police विभाग ने कानून के तहत जरूरी सभी कदम उठाए हैं. आवश्यक सबूत जुटाकर अदालत में पेश किए गए हैं. मुझे न्यायपूर्ण फैसले की उम्मीद है. अब इंतजार करते हैं.”
भाजपा द्वारा मामले को लेकर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इस मामले के दो पहलू हैं. एक Political बयानबाजी का है, जहां सार्वजनिक विमर्श के तहत बयान दिए जाते हैं. विपक्ष इस तरह की टिप्पणियां करता रहा है.
उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है. अदालत आज अपना फैसला सुनाएगी और उसके बाद Government आगे की कार्रवाई तय करेगी.
Bengaluru स्थित आतंकवाद मामलों की विशेष एनआईए अदालत ने मंगलुरु कुकर बम ब्लास्ट मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक की दोष स्वीकार करने वाली याचिका स्वीकार कर ली है. यह विस्फोट 19 नवंबर 2022 को मंगलुरु में एक ऑटो रिक्शा के अंदर हुआ था.
मुख्य आरोपी मोहम्मद शारिक उर्फ मोहम्मद शारिक प्रेमराज हटगी उर्फ प्रेमराज उर्फ गौली अरुण कुमार, शिवमोग्गा का रहने वाला है. 27 वर्षीय शारिक ने घटना के करीब तीन साल बाद आरोप स्वीकार किए हैं.
उसने 20 अप्रैल 2024 को आरोप तय होने के समय खुद को निर्दोष बताया था, लेकिन दिसंबर 2025 में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 229 के तहत नया आवेदन देकर अपना रुख बदल लिया.
जांच एजेंसी के अनुसार, शारिक उस समय प्रेशर कुकर बम को मंगलुरु में लगाने के लिए ले जा रहा था, लेकिन टाइमर में खराबी आने से बम उसके पास ही समय से पहले फट गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गया. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद एनआईए ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.
एनआईए का दावा है कि शारिक इस्लामिक स्टेट से प्रेरित शिवमोग्गा मॉड्यूल का हिस्सा है, जो 2020 से कई आतंकी गतिविधियों से जुड़ा रहा है. सितंबर 2022 में शिवमोग्गा में आईईडी परीक्षण मामले में भी वह वांछित था.
जांच एजेंसी ने यह भी कहा है कि यही मॉड्यूल 1 मार्च 2024 को Bengaluru के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले से भी जुड़ा है, जिसमें इसी तरह का आईईडी इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई थी.
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डीएससी
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