कर्नाटक हाईकोर्ट ने मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक पर भीड़ के हमले को लेकर सरकार और पुलिस को फटकारा

Bengaluru, 31 जुलाई . कर्नाटक हाईकोर्ट ने चामराजनगर जिले में मानसिक रूप से बीमार 19 वर्ष के युवक पर भीड़ के कथित हमले को लेकर राज्य Government और Police को कड़ी फटकार लगाई. जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने कर्नाटक में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए.

हाल ही में एक लड़के के पिता की तरफ से अपने बेटे के खिलाफ क्रिमिनल केस रद्द करने की मांग वाली एक पिटीशन दायर की गई थी. इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस नागप्रसन्ना ने घटना की तस्वीरें दिखाए जाने के बाद कड़ी बातें कहीं.

सुनवाई के दौरान जज ने कहा, “क्या यह कानून का राज है? यह क्या है? इसीलिए मैं रोज कह रहा हूं, राज्य में अराजकता है. कानून का कोई राज नहीं है. दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं होता. डेमोक्रेटिक सिस्टम में ऐसा नहीं होता.”

यह मामला पिछले महीने चामराजनगर जिले के एक गांव में हुई एक घटना से जुड़ी है, जहां मानसिक रूप से अस्वस्थ 19 वर्ष के लड़के पर डॉ. अंबेडकर की तस्वीर वाले साइनबोर्ड की लाइटिंग को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था.

कोर्ट में दी गई दलीलों के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर लड़के को नंगा कर दिया, उसे बिजली के खंभे से बांध दिया, और Police वालों के मौके पर पहुंचने और उसे बचाने से पहले उस पर हमला किया. उसकी दिमागी हालत सही न होने के बावजूद Police ने उस युवक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के सेक्शन 299 और 324(4) के तहत केस दर्ज किया.

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले Police को निर्देश दिया था कि वह याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई न करे. इस घटना पर चिंता जताते हुए जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा कि डेमोक्रेटिक समाज में ऐसे कामों की कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा, “सबसे बुरे राज में भी ये चीजें बहुत पहले बंद हो गई हैं लेकिन इस देश में नहीं.”

कोर्ट को यह भी बताया गया कि एक सुपरिटेंडेंट ऑफ Police कैमरे में युवक को देश निकाला देने की धमकी देते हुए और हर साल उसके खिलाफ First Information Report दर्ज करने की चेतावनी देते हुए दिखाई दे रहे थे. जज ने पूछा, “एसपी को इस तरह बात करने का कोई हक नहीं है. इस तरह का तुष्टिकरण क्या है?” यह मामला अभी भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है.

एसडी/पीएम