
Bengaluru, 21 जुलाई . कर्नाटक Government ने Tuesday को Bengaluru दक्षिण तालुक के काग्गलिपुरा और आसपास के क्षेत्रों में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन तथा उससे संबद्ध संस्थाओं पर सरकारी और सार्वजनिक भूमि के कथित अतिक्रमण के आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है.
राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय Bengaluru संभागीय आयुक्त की रिपोर्ट और सहायक भूमि अभिलेख निदेशक (एडीएलआर) द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में सामने आए निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है.
Government के अनुसार एसआईटी काग्गलिपुरा गांव के सर्वे नंबर-46 समेत आसपास के अगारा और जी.एम. पाल्या गांवों में कथित अतिक्रमण की व्यापक जांच करेगी. जांच के दायरे में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन, वेद विज्ञान महा विद्यापीठ, आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर, सुमेरु ग्लोबल सर्विसेज सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, सुमेरु इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड तथा अन्य संबंधित व्यक्ति और संस्थाएं शामिल होंगी.
Government का कहना है कि भूमि अभिलेखों और सर्वेक्षण से संकेत मिले हैं कि कई दशकों के दौरान लीज, समझौतों और अन्य लेन-देन के माध्यम से 290 एकड़ से अधिक सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि संगठन और उससे जुड़े संस्थानों के नियंत्रण में आ गई है.
एसआईटी को यह जांच करने का जिम्मा सौंपा गया है कि क्या सरकारी भूमि पर विभिन्न लीज समझौतों के जरिए कब्जा किया गया, शर्तों के साथ आवंटित भूमि को बिक्री व अन्य समझौतों के माध्यम से हस्तांतरित किया गया, सार्वजनिक उपयोग और नागरिक सुविधाओं के लिए आरक्षित भूमि पर ट्रस्टों और संबद्ध संस्थाओं के जरिए अतिक्रमण किया गया तथा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण किए गए.
सरकारी आदेश में बताया गया है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रविशंकर समेत कई पदाधिकारियों और संबद्ध संस्थाओं के अधिकारियों के खिलाफ पहले से First Information Report दर्ज है. यह मामला काग्गलिपुरा गांव के सर्वे नंबर 160, 164/1, 164/2, 150 और 137 में कथित अतिक्रमण से जुड़ा है.
Government ने सितंबर 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उन निर्देशों का भी उल्लेख किया है, जिनमें अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने और विवादित भूमि का सर्वे कराने को कहा गया था. हालांकि सर्वे के दौरान अधिकारियों को स्थानीय लोगों और संगठन से जुड़े व्यक्तियों के विरोध का सामना करना पड़ा था.
रिपोर्ट के अनुसार कथित अतिक्रमण काग्गलिपुरा, अगारा और जी.एम. पाल्या गांवों तक फैला हुआ है. सरकारी रिकॉर्ड में इन क्षेत्रों में सार्वजनिक सड़कें, जलाशय, नाले और ‘बी-खराब’ श्रेणी की सरकारी भूमि दर्ज है.
Government ने बताया कि सर्वे नंबर-46 की 41 एकड़ भूमि वर्ष 1985 में 40 वर्षों के लिए 500 रुपये प्रति एकड़ वार्षिक की नाममात्र दर पर लीज पर दी गई थी. Government का दावा है कि 2015 में लीज अवधि समाप्त होने के बावजूद संगठन अब भी इस भूमि का उपयोग कर रहा है. वहीं जी.एम. पाल्या के सर्वे नंबर-135 की 19 एकड़ भूमि वर्ष 2003 में 30 वर्षों के लिए लीज पर दी गई थी, जिसकी अवधि अभी सात वर्ष शेष है.
प्रारंभिक जांच में Government ने पाया है कि संगठन और उससे जुड़ी संस्थाओं के नियंत्रण में वर्तमान में करीब 291 एकड़ 38 गुंटा भूमि है, जिसमें लगभग 60 एकड़ सरकारी लीज वाली भूमि भी शामिल है. Government ने कई लीज शर्तों और भूमि कानूनों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है.
एसआईटी को भूमि अभिलेख, लीज डीड और अनुदान संबंधी दस्तावेजों की जांच, लाभार्थियों और कानूनी उत्तराधिकारियों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों की पड़ताल, लीज शर्तों के पालन की समीक्षा, सैटेलाइट इमेजरी और जियोस्पेशियल तकनीक से नए सर्वे कराने, सार्वजनिक सड़क, जलाशय और नागरिक सुविधाओं की पहचान करने तथा सभी पक्षों की सुनवाई कर तीन महीने के भीतर Government को अंतिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
यह एसआईटी कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 की धारा 195 और कर्नाटक भूमि हड़प निषेध अधिनियम, 2011 की धारा 8 के तहत गठित की गई है. Government का कहना है कि जांच का उद्देश्य कथित अतिक्रमण की वास्तविक सीमा का पता लगाना, सरकारी और सार्वजनिक भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करना है.
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डीएससी
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