
Bengaluru, 3 जुलाई . कर्नाटक में डीके. शिवकुमार को Chief Minister बने एक महीना हो चुका है. लेकिन, राज्य Government में अभी सिर्फ 13 मंत्री ही काम कर रहे हैं, जबकि मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं, फिर भी कैबिनेट में 20 पद अब भी खाली हैं.
सत्ताधारी कांग्रेस के अंदर Political खींचतान और मंत्री पद के लिए चल रही लॉबिंग के कारण कैबिनेट विस्तार में लगातार देरी हो रही है. इसकी वजह से कई अहम विभागों को अब तक स्थायी मंत्री नहीं मिले हैं. यह स्थिति ऐसे समय में बनी है, जब राज्य सूखे, कानून-व्यवस्था की चुनौतियों और कई प्रशासनिक समस्याओं का सामना कर रहा है.
अपने पूर्ववर्ती सिद्दारमैया के साथ सत्ता साझेदारी को लेकर लंबे समय तक चले विवाद के बाद 3 जून को डीके. शिवकुमार ने Chief Minister पद की शपथ ली. उम्मीद थी कि उनके Chief Minister बनने के बाद कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और अनिश्चितता खत्म हो जाएगी. लेकिन, एक महीने बाद भी कैबिनेट का विस्तार नहीं हो पाया है. इसकी वजह पार्टी के भीतर Political संतुलन बनाने की कोशिशें और मंत्री पद को लेकर जारी खींचतान बताई जा रही है.
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सिद्दारमैया ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा है. वहीं, मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे कई वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर करने से परहेज किया है.
कृष्णा बायरे गौड़ा, रामलिंगा रेड्डी और के.एच. मुनियप्पा जैसे वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री पद नहीं मिलने पर पहले अपनी नाराजगी जताई थी. हालांकि, अब उन्होंने अपना ध्यान कामकाज पर केंद्रित कर लिया है. वहीं, पूरी कैबिनेट का गठन नहीं होने के कारण मौजूदा मंत्रियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी आ गई हैं.
एकता दिखाने की कोशिश के तौर पर, Chief Minister शिवकुमार ने इस अहम पद पर एक महीना पूरा होने के मौके पर Bengaluru में सिद्दारमैया के घर जाकर उनसे मुलाकात की. उनके साथ उनकी पत्नी उषा शिवकुमार और भाई, पूर्व सांसद डी.के. सुरेश भी थे. नेताओं ने नाश्ते पर बैठक की और राज्य में चल रही Political गतिविधियों पर चर्चा की.
Government को अपने पहले महीने में कई Political और प्रशासनिक विवादों का सामना करना पड़ा है. प्रियांक खड़गे, एम.बी. पाटिल और कृष्णा बायरे गौड़ा जैसे मंत्रियों ने Government का लगातार बचाव किया है. इस दौरान राज्य में कई आपराधिक घटनाएं हुईं. साथ ही, प्रियांक खड़गे की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर की गई टिप्पणी विवादों में रही. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में Government के हस्तक्षेप के भाजपा और जेडी(एस) के आरोप भी लगे.
इसके अलावा, Bengaluru के पास प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर Union Minister एच.डी. कुमारस्वामी और Chief Minister डीके. शिवकुमार के बीच भी Political टकराव देखने को मिला.
कैबिनेट पूरी तरह गठित न होने के बावजूद Chief Minister डीके. शिवकुमार ने कई अहम नीतिगत फैसलों की घोषणा की है. इनमें पूरे कर्नाटक के छात्रों के लिए मुफ्त बस पास, हर ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड में 10-10 लाख रुपए की सहायता से ‘India जोड़ो यूथ एसोसिएशन’ बनाने की योजना, 2,500 वर्ग फुट तक के नए मकानों को स्थायी बिजली कनेक्शन के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) की अनिवार्यता से छूट और पूरे राज्य में ‘बी’ खाता संपत्तियों को ‘ए’ खाता में बदलने की योजना शामिल है.
अन्य अहम घोषणाओं में Bengaluru की सड़कों को गड्ढों से मुक्त बनाने के लिए 2,000 करोड़ रुपए का प्रोग्राम, प्राइवेट सेक्टर एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज की स्थापना, 72,000 सरकारी रिक्तियों को भरने के लिए छह महीने की समय-सीमा और लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए एक अलग ‘प्रजा सेवा’ (जन सेवा) मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव शामिल है.
Government ने अपनी प्रमुख गारंटी योजनाओं के तहत लाभार्थियों के दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है और बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच आरटीसी बस के किराए में संशोधन पर विचार कर रही है.
हालांकि, Political जानकारों का कहना है कि Government का कामकाज सिर्फ Chief Minister और कुछ मंत्रियों के भरोसे नहीं चल सकता. खासकर तब, जब कई अहम विभागों को अब भी पूर्णकालिक मंत्री नहीं मिले हैं और वे Political नेतृत्व का इंतजार कर रहे हैं.
विपक्ष ने देरी को लेकर बार-बार Government को निशाना बनाया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि Chief Minister कैबिनेट विस्तार को टालने के लिए चल रही एसआईआर का बहाना बना रहे हैं. Chief Minister अच्छी तरह जानते हैं कि अगर कैबिनेट का विस्तार हुआ तो उनकी Government की नींव हिल जाएगी. यही वजह है कि वे एसआईआर का बहाना बना रहे हैं.
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व फिलहाल कैबिनेट विस्तार की जल्दबाजी में नहीं है. नेतृत्व को आशंका है कि कुछ नेताओं को मंत्री बनाकर और कुछ को बाहर रखने से पार्टी के भीतर नाराजगी बढ़ सकती है. कैबिनेट में अभी 20 पद खाली हैं और कई वरिष्ठ नेता अहम मंत्रालयों के दावेदार हैं. ऐसे में पार्टी नेतृत्व अनुभवी विधायकों के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी मौका देने पर विचार कर रहा है.
–
एसएचके/एबीएम
Skip to content