कपिल सिब्बल ने सांसद-विधायकों के दल-बदल के खिलाफ किया Supreme Court का रुख

New Delhi, 22 जुलाई . वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने Supreme Court में एक याचिका दायर की है, जिसमें चिंता जताई गई है कि Political दल-बदल के खिलाफ कानून बेअसर होता जा रहा है.

Supreme Court की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के अनुसार, Government के खिलाफ इस याचिका को 20 जुलाई को दायर किया गया. Wednesday को India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश होते हुए सिब्बल ने इस मामले का जिक्र किया और जल्द सुनवाई की मांग की.

यह मामला India के संविधान की दसवीं अनुसूची को प्रभावी ढंग से लागू करने से जुड़ा है. इस अनुसूची में दलबदल-रोधी कानून शामिल है, जिसका मकसद चुने गए विधायकों या सांसदों को चुनाव जीतने के बाद Political दल बदलने से रोकना है.

कपिल सिब्बल की याचिका विपक्षी Political दलों के विलय से जुड़े मुद्दों पर आधारित है. उन्होंने दसवीं अनुसूची की उस व्याख्या को चुनौती दी है, जिसके तहत अलग हुए गुट विलय का रास्ता अपनाकर दलबदल-रोधी कानून के दायरे से बच सकते हैं.

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच में कपिल सिब्बल ने कहा, “मैंने खुद एक पक्षकार के तौर पर याचिका दायर की है. यह इस मुद्दे से जुड़ी है कि क्या देश में जिस तरह से संसद की संरचना बदली जा रही है, वह संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा-4 की सही व्याख्या के अनुरूप है?”

हाल की Political घटनाओं पर चिंता जताते हुए सिब्बल ने कहा कि अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो दसवीं अनुसूची के तहत ‘दल-बदल विरोधी कानून’ बेअसर हो जाएगा.

उन्होंने कहा, “इस देश में क्या हो रहा है? अगर ऐसा ही चलता रहा, तो दसवीं अनुसूची का कोई मतलब नहीं रह जाएगा.” उन्होंने यह भी कहा कि शिवसेना (UBT) द्वारा दायर इसी तरह का एक मामला पहले से ही Supreme Court में लंबित है.

इसके जवाब में, सीजेआई सूर्यकांत ने भरोसा दिलाया कि मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा.

यह याचिका विपक्षी दलों के विधायकों से जुड़े हालिया Political दल-बदल और विलय की घटनाओं के बीच दायर की गई है. इस बीच, Supreme Court Wednesday को शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत की याचिका पर भी सुनवाई करने वाला है. सावंत ने Lok Sabha स्पीकर ओम बिरला के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें छह शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मान्यता दी गई थी.

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