ममता बनर्जी को कल्याण बनर्जी के अल्टीमेटम से छिड़ा नया राजनीतिक घमासान

New Delhi, 12 जून . तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी की ओर से Friday को अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधे जाने के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती दरार पर अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी. वहीं, भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इन घटनाक्रमों से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के अंत का संकेत मिलता है.

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि तृणमूल के अंदरूनी मतभेद अब साफ तौर पर दिखने लगे हैं.

उन्होंने कहा कि टीएमसी के सदस्य खासकर सांसद, एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं और इसीलिए ऐसी घटनाएं हो रही हैं. शुरू से ही पार्टी का सीनियर नेतृत्व अभिषेक बनर्जी के टीएमसी में दूसरे सबसे ताकतवर नेता के तौर पर अचानक उभरने से खुश नहीं था.

बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने दावा किया कि ये घटनाक्रम पार्टी के अंदर गहरे संकट की ओर इशारा करते हैं.

उन्होंने कहा कि टीएमसी का अस्तित्व खत्म हो चुका है. टीएमसी के विधायकों और सांसदों में गहरी नाराजगी है और इस नाराजगी की मुख्य वजह अभिषेक बनर्जी द्वारा पैदा की गई अशांति है. पार्टी ने जनता के साथ-साथ कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों का भी समर्थन खो दिया है.

बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, “जब ममता बनर्जी की Government मजबूती से सत्ता में थी तो अभिषेक बनर्जी जो कुछ भी कहते थे, वही नियम बन जाता था. सालों तक टीएमसी सांसद दबाव में काम करते रहे. अब जब उन्हें खुली हवा में सांस लेने का मौका मिल रहा है तो कई नेता खुलकर बोल रहे हैं और अपनी असली सोच जाहिर कर रहे हैं.”

उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “लोगों को अब एहसास हो गया है कि टीएमसी ने जो रास्ता चुना था, वह सही दिशा में नहीं था. जो लोग उस रास्ते पर चले, वे अब समझ रहे हैं कि आज एनडीए की Government है और एनडीए का एकमात्र फोकस विकास है.”

Samajwadi Party के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि टीएमसी नेताओं की आलोचना ममता बनर्जी के बजाय अभिषेक बनर्जी पर केंद्रित लग रही है.

वर्मा ने कहा, “कल्याण बनर्जी चार बार के सांसद हैं और ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं. वे हमेशा इस बात के लिए खड़े रहे हैं कि ममता बनर्जी या पार्टी को कोई नुकसान न हो. यह साफ है कि किसी भी बागी सांसद को ममता बनर्जी से कोई निजी समस्या नहीं है. अगर कोई समस्या है, तो वह अभिषेक बनर्जी से है.”

ये प्रतिक्रियाएं तब आईं जब टीएमसी के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी की आलोचना की और पार्टी में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए.

कल्याण बनर्जी ने कहा, “यह मेरे लिए बहुत अपमानजनक है. उनके अहंकारी रवैये ने पार्टी को बर्बाद कर दिया है. उन्हें यह समझना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें हर दिन लगता है कि वही राजा हैं. बुरे दिनों में भी, जब मैं पार्टी के साथ खड़ा रहता हूं और ममता बनर्जी का समर्थन करता हूं तब अभिषेक बनर्जी के इस रवैये के कारण मेरे लिए काम करना मुश्किल हो जाता है.”

पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलों को और हवा देते हुए, इस वरिष्ठ सांसद ने पार्टी नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया.

उन्होंने कहा, “सबसे पहले ममता दी को तय करना होगा. उन्हें ही फैसला लेना है. अगर वह अभिषेक के बिना पार्टी को आगे नहीं बढ़ा सकतीं, तो मैं उनके साथ नहीं रहूंगा.”

करीब 15 सालों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी और टीएमसी का दबदबा रहा, उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और लगातार चार Lok Sabha चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरीं. हालांकि, अभिषेक बनर्जी पर कल्याण बनर्जी के सार्वजनिक हमले ने पार्टी के शीर्ष स्तर पर मौजूद दरारों को उजागर कर दिया है, जिससे एक नया Political तूफान खड़ा हो गया है.

डीकेएम/पीएम