
कोलकाता, 26 मई . सांसद काकोली घोष दस्तीदार के तृणमूल के बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद, Tuesday को Chief Minister सुवेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया, जिससे उनके अगले कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. इस प्रशासनिक बैठक में, जो नदिया जिले के कल्याणी में हुई, दस्तीदार के अलावा उत्तरी 24 परगना जिले के तृणमूल के तीन विधायक भी मौजूद थे.
काकोली ने एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में हिस्सा लिया.
इस बैठक में तृणमूल के नवनिर्वाचित विधायक देगंगा से अनीसुर रहमान बिदेश, स्वरूपनगर से बीना मंडल और हारोआ से अब्दुल मतीन भी मौजूद थे.
इस घटनाक्रम के बाद, काकोली के तृणमूल कांग्रेस छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं.
हालांकि, Government बनाने के बाद Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की थी कि विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा.
भाजपा सूत्रों के अनुसार, Chief Minister के आदेश पर काकोली सहित तृणमूल के प्रतिनिधियों को बुलाया गया था.
पार्टी के अनुसार, इसमें कोई राजनीति नहीं है. तृणमूल विधायक भी यही बात कह रहे हैं.
बीना मंडल ने कहा कि मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए इस प्रशासनिक बैठक में आई हूं.
दूसरी ओर, अब्दुल मतीन ने कहा कि राज्य Government ने मुझे बुलाया था. इसलिए मैं आया हूं. पहले क्या हुआ, इस बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता. मैं एक विधायक के तौर पर आया हूं.
देगंगा के विधायक अनीसुर रहमान ने कहा कि मेरी विधानसभा क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा पिछड़ा हुआ है. इसके समग्र विकास के लिए राज्य Government का सहयोग जरूरी है.
सुवेंदु की बैठक में काकोली की मौजूदगी राज्य की राजनीति में काफी अहम मानी जा रही है. हाल ही में, काकोली को तृणमूल संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटा दिया गया था. यह जिम्मेदारी सांसद कल्याण बनर्जी को सौंपी गई है.
इसके बाद, काकोली ने social media पर एक पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि उन्हें मैं काफी समय से जानती हूं, और 84 में उनके साथ अपना सफर शुरू किया था. आज, चार दशकों की वफादारी का मुझे यह इनाम मिला है.
उन्होंने बारासात संगठनात्मक जिला तृणमूल अध्यक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया था.
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डीकेएम/एबीएम
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