जेपी नड्डा दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य परिषद सम्मेलन की करेंगे अध्यक्षता

New Delhi, 29 जून . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा Monday को राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) के 16वें सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे. बच्चों के स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रमुख मुद्दों की समीक्षा के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी.

सम्मेलन के दौरान Union Minister समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (एसएसबीएसके) का भी शुभारंभ करेंगे. यह एक व्यापक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य जन्म से लेकर 36 माह तक के बच्चों को निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है.

यह सम्मेलन विज्ञान भवन में आयोजित होगा, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद तथा केंद्र एवं राज्य Governmentों के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे. बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी), खाद्य एवं औषधि सुधार तथा संबद्ध स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.

आधिकारिक बयान के अनुसार, एसएसबीएसके का शुभारंभ देश के प्रत्येक बच्चे को व्यापक, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में Government की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है.

यह कार्यक्रम जन्म से लेकर 36 माह तक के बच्चों के लिए घर और समुदाय आधारित देखभाल की एक निर्बाध व्यवस्था उपलब्ध कराने की परिकल्पना करता है. इसमें जीवन के पहले तीन वर्षों को बच्चे के जीवित रहने, उसके विकास, पोषण और मस्तिष्क के प्रारंभिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है.

एसएसबीएसके, होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर (एचबीएनसी) और होम-बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड (एचबीवाईसी) जैसी दो प्रमुख सामुदायिक आधारित योजनाओं को एकीकृत कर एक समग्र राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में कार्य करेगा.

इन दोनों कार्यक्रमों के एकीकरण से जन्म से लेकर जीवन के पहले तीन वर्षों तक बच्चों की देखभाल में निरंतरता सुनिश्चित की जाएगी. साथ ही, एक समेकित दृष्टिकोण के माध्यम से बच्चों के जीवित रहने, पोषण, स्वस्थ विकास और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास को मजबूत किया जाएगा.

पहली बार इस कार्यक्रम के तहत नवजात शिशुओं और “जोखिमग्रस्त (एट-रिस्क)” बच्चों के लिए जोखिम-आधारित (रिस्क-स्ट्रैटिफाइड) प्रणाली लागू की जाएगी. ऐसे बच्चों को उनके जोखिम के स्तर के अनुसार अतिरिक्त घरेलू स्वास्थ्य सेवाएं और फॉलो-अप प्रदान किया जाएगा.

कार्यक्रम के तहत “जोखिमग्रस्त” नवजात शिशुओं को जन्म के बाद पहले 42 दिनों के भीतर अधिकतम नौ बार घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी, जबकि “जोखिमग्रस्त” बच्चों को 36 माह की आयु तक अधिकतम आठ बार घरेलू स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

यह कार्यक्रम आशा कार्यकर्ताओं (आशा), सहायक नर्स मिडवाइफ (एएनएम), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) द्वारा संयुक्त रूप से घर-घर जाकर सेवाएं प्रदान करने के माध्यम से देखभाल की निरंतरता को भी मजबूत करेगा.

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर वेल-बेबी सेशन तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रत्येक माह शिशु शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि “जोखिमग्रस्त” बच्चों की समय रहते पहचान, मूल्यांकन और उपचार सुनिश्चित किया जा सके.

कार्यक्रम में निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस), चाइल्ड ट्रैकिंग एप्लीकेशन, रेफरल प्रणाली और अलर्ट मैकेनिज्म जैसी डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे निगरानी, फॉलो-अप और माताओं एवं बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके.

एएस