जेपी नड्डा ने तीसरी एमएसजी बैठक की अध्यक्षता की, तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

New Delhi, 10 जुलाई . केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी. नड्डा ने Friday को आयुष्मान India डिजिटल मिशन (एबीडीएम) की तीसरी मिशन संचालन समूह (एमएसजी) बैठक की अध्यक्षता की. इस दौरान उन्होंने देश के डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम की प्रगति की समीक्षा की.

बैठक में त्रिपुरा के Chief Minister डॉ. माणिक साहा, Madhya Pradesh के उपChief Minister राजेंद्र शुक्ला, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, अनुप्रिया पटेल और जितिन प्रसाद सहित नीति आयोग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए), आयुष मंत्रालय और विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

बैठक को संबोधित करते हुए जे.पी. नड्डा ने नागरिक-केंद्रित, इंटरऑपरेबल और तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अब मिशन के अगले चरण में पूरे देश में इसके अधिकतम उपयोग अपनाने पर विशेष ध्यान देना होगा.

नड्डा ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है. प्रत्येक नागरिक को अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराना एबीडीएम का प्रमुख उद्देश्य है. उनके अनुसार, तकनीक ‘यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बशर्ते यह समावेशी, सुलभ और उपयोग में आसान हो.

बैठक के दौरान मिशन संचालन समूह ने एबीडीएम के तहत अब तक हासिल की गई उपलब्धियों की समीक्षा की. अधिकारियों ने बताया कि आयुष्मान India डिजिटल मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम में से एक के रूप में उभर चुका है. अब तक देशभर में 93.95 करोड़ से अधिक एबीएचए नंबर बनाए जा चुके हैं, जबकि 105 करोड़ से ज्यादा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से लिंक किए गए हैं. इसके अलावा, नेशनल डिजिटल हेल्थ रजिस्ट्री में 5.33 लाख स्वास्थ्य संस्थान और 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर पंजीकृत हो चुके हैं.

मिशन के तहत 2.72 लाख स्वास्थ्य संस्थानों ने एबीडीएम समर्थित सॉफ्टवेयर अपनाया है. वहीं, अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण को तेज और आसान बनाने के लिए करीब 24 करोड़ ‘स्कैन एंड रजिस्टर’ टोकन जारी किए गए हैं. इससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का सुरक्षित और सहमति-आधारित डिजिटल आदान-प्रदान संभव हो रहा है.

बैठक में पिछली समीक्षा बैठक के बाद लिए गए निर्णयों पर हुई प्रगति का भी आकलन किया गया. इसमें राज्यों में क्षमता निर्माण, डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म का सरकारी योजनाओं से एकीकरण, निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की भागीदारी बढ़ाने, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने जैसे विषय शामिल रहे.

मिशन संचालन समूह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘मॉडल डिस्ट्रिक्ट’, ‘मॉडल फैसिलिटी’ और ‘आरोग्य सेतु 2.0’ जैसी पहलों की सराहना की. साथ ही आयुष्मान India पीएम-जेएवाई, सीजीएचएस, ईएसआईसी और निक्षय जैसी प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म के बेहतर एकीकरण पर भी संतोष व्यक्त किया गया. सदस्यों का मानना था कि इन पहलों से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक तेज, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बन रही हैं.

बैठक में भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा हुई, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के उपयोग, डिजिटल हेल्थ स्टैंडर्ड्स को बढ़ावा देने, इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करने और राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया.

समापन संबोधन में जेपी. नड्डा ने कहा कि एबीडीएम के तहत मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार किया जा चुका है, लेकिन अब इसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाना ‘विकसित India 2047’ के लक्ष्य की आधारशिला है और आयुष्मान India डिजिटल मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होगा. उन्होंने केंद्र, राज्यों और सभी संबंधित पक्षों से मिलकर प्रत्येक नागरिक के लिए सुरक्षित, सरल और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य करने का आह्वान किया.

एससीएच/एबीएम