
New Delhi, 25 जून . राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 को तत्काल वापस लेने की मांग की है. उन्होंने इन नियमों को एफसीआरए, 2010 लागू होने के बाद से देश के स्वैच्छिक और सामाजिक संगठनों के कामकाज में सबसे व्यापक सरकारी हस्तक्षेपों में से एक बताया है.
डॉ. ब्रिटास ने अपने विस्तृत पत्र में कहा कि नए नियम केवल विदेशी चंदे को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि स्वैच्छिक संगठनों के पूरे कामकाज को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं. उनके अनुसार, ये संशोधन एफसीआरए की मौजूदा व्यवस्था की मूल संरचना को बदलते हैं और Government को अधिक विवेकाधिकार, व्यक्तिगत जवाबदेही का विस्तार, संगठनों की कार्यगत स्वतंत्रता पर रोक तथा व्यापक अनुपालन और निगरानी व्यवस्था स्थापित करने का अधिकार देते हैं.
पत्र में उन्होंने नियमों में शामिल किए गए ‘धर्मांतरण प्रचार’ शब्द पर भी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इस शब्द की कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे इसकी व्याख्या पूरी तरह सरकारी अधिकारियों के विवेक पर निर्भर हो जाएगी और मनमाने या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई का खतरा बढ़ जाएगा. उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर पड़ सकता है.
डॉ. ब्रिटास ने नए नियमों में प्रकाशनों, लेखों, आधिकारिक वेबसाइटों, social media खातों और संस्थागत संचार से जुड़ी व्यापक जानकारी देने की अनिवार्यता पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल वित्तीय जवाबदेही तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक निगरानी तंत्र का रूप ले सकती है.
पत्र में कहा गया है कि ये संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(c), 25, 26, 29 और 30 के तहत प्रदत्त अधिकारों से जुड़े गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करते हैं.
डॉ. ब्रिटास ने इन संशोधनों को नागरिक समाज पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण की प्रवृत्ति का हिस्सा बताते हुए केंद्र Government से नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है और व्यापक परामर्श प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया है.
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एएमटी/पीएम
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