
रांची, 12 अप्रैल . Jharkhand कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से Sunday को आयोजित Jharkhand उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा में पेपर लीक की साजिश का रांची Police ने पर्दाफाश करते हुए एक बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में गिरोह के मुख्य सरगना समेत कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 159 अभ्यर्थी भी शामिल हैं. गिरफ्तार अभ्यर्थियों में सात महिलाएं भी हैं.
एसएसपी राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में गठित टीम ने तमाड़ थाना क्षेत्र के एक निर्माणाधीन भवन में छापेमारी की. Police के अनुसार, 11 अप्रैल की देर रात की गई इस कार्रवाई के दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद लोग भागने की कोशिश करने लगे. हालांकि, Police ने घेराबंदी कर सभी को हिरासत में ले लिया.
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह के एजेंट अभ्यर्थियों को परीक्षा पास कराने के नाम पर 10 से 15 लाख रुपये तक वसूल रहे थे. अभ्यर्थियों को सुनसान स्थान पर लाकर कथित तौर पर लीक प्रश्न-पत्र और उनके उत्तर उपलब्ध कराए जाते थे और उन्हें याद कराया जाता था. Police ने मौके से प्रश्न-उत्तर के तैयार सेट, प्रिंटर, कई मोबाइल फोन, फटे हुए एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों द्वारा दिए गए बैंक चेक और आठ वाहनों को जब्त किया है.
Police के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों ने कार्रवाई से बचने के लिए अपने मोबाइल फोन और एडमिट कार्ड गिरोह के सदस्यों को सौंप दिए थे. बरामद वाहनों के मालिकों और उनके उपयोग की भी जांच की जा रही है.
मामले में तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/26, दिनांक 12 अप्रैल 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई है. रांची Police ने Jharkhand कर्मचारी चयन आयोग के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का मुख्य सरगना अतुल वत्स भी शामिल है, जो बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी है. Police के अनुसार, उसका आपराधिक इतिहास लंबा रहा है और वह कई बड़े परीक्षा घोटालों में शामिल रहा है. इनमें Rajasthan क्लर्क भर्ती परीक्षा (2017), नीट पेपर लीक (2024), बिहार में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती परीक्षा (2024), उत्तर प्रदेश आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा (2024), और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा (2024) शामिल हैं. आरओ/एआरओ मामले में उसे यूपी एसटीएफ द्वारा पहले गिरफ्तार किया जा चुका है.
Police का कहना है कि इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों, स्थानीय एजेंटों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है. साथ ही बैंक खातों, चेक और मोबाइल डेटा की भी पड़ताल जारी है. Police को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित करता रहा है.
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एसएनसी/डीकेपी
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