
रांची, 13 अप्रैल . Supreme Court के निर्देशों के अनुरूप राज्य के ओपन जेल में सुविधाओं की उपलब्धता और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर Jharkhand हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अहम निर्देश जारी किए हैं.
Monday को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई. खंडपीठ ने राज्य Government को गृह सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया.
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस कमेटी में आईजी प्रिजन और संबंधित ओपन जेल के जेल सुपरिटेंडेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि ओपन जेलों की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके. हाईकोर्ट ने राज्य Government को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक कमेटी गठन से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए.
मामले की अगली सुनवाई 11 जून को निर्धारित की गई है. सुनवाई के दौरान राज्य Government की ओर से अधिवक्ता पीयूष चित्रेश ने पक्ष रखा. दरअसल, Supreme Court ने देश के सभी राज्यों को ओपन जेलों की स्थिति सुधारने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग के तहत एक कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है.
इस कमेटी का उद्देश्य ओपन जेलों में कैदियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाना है. शीर्ष अदालत के निर्देशों के तहत गठित कमेटी को ओपन जेलों में जिम, चिकित्सा सुविधा, भोजन की गुणवत्ता और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा कर उन्हें बेहतर बनाने के लिए काम करना है.
साथ ही कैदियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सामाजिक पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में भी पहल करने का निर्देश दिया गया है. इसी क्रम में Jharkhand हाई कोर्ट ने Supreme Court के आदेश के आलोक में इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया और राज्य Government को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है.
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एसएनसी/डीएससी
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