
गांधीनगर, 28 जून . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने Sunday को कहा कि Prime Minister Narendra Modi की Government द्वारा शुरू किए गए सुधारों ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए कल्याणकारी योजनाओं की डिलीवरी में होने वाली लीकेज को खत्म कर दिया है. उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा दिया गया हर रुपया अब सीधे लाभार्थियों तक पहुंचता है.
गांधीनगर में अमित शाह ने ‘पीएम फैमिली केयर ट्रैकर’ पायलट प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया. उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश के Prime Minister ने माना था कि अगर वह दिल्ली से एक रुपए भेजते थे, तो गरीबों तक सिर्फ 15 पैसे पहुंचते थे, जबकि 85 पैसे बीच में ही गायब हो जाते थे.
उन्होंने कहा कि डीबीटी की शुरुआत ने सरकारी मदद की डिलीवरी को पूरी तरह से बदल दिया है.
उन्होंने कहा, “आज केंद्रीय गृह मंत्री और एक सांसद के तौर पर मैं सबकी आंखों में आंखें डालकर कह सकता हूं कि जब पीएम मोदी एक रुपए भेजते हैं, तो पूरा एक रुपए सीधे गरीब व्यक्ति के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर होता है.”
शाह के अनुसार, डीबीटी आर्किटेक्चर ने बिना किसी बिचौलिए के सीधे बैंक अकाउंट में फायदे ट्रांसफर करके गरीबों के लिए वेलफेयर का एक नया दौर शुरू किया है.
उन्होंने कहा कि Government बदलने से पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में घूमते हुए उन्होंने खुद गरीबी की हद देखी थी.
उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि Gujarat में गरीबी नहीं है, लेकिन जब मैं उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल इलाके में गया, तो मैंने महसूस किया कि बहुत ज्यादा गरीबी का असली मतलब क्या होता है.”
उन हालात के बारे में बताते हुए शाह ने कहा कि कई परिवारों के पास घर, बिजली, टॉयलेट, पाइप वाला पानी और हेल्थकेयर की सुविधा नहीं थी.
उन्होंने कहा, “लोगों के पास घर नहीं थे. अगर घर नहीं होता, तो बिजली भी नहीं होती. अनगिनत घरों में टॉयलेट नहीं थे. जहां झोपड़ी भी थी, वहां अंदर पानी की सप्लाई नहीं थी. कई गरीब परिवारों की पहुंच से इलाज बाहर था और जब बच्चे बीमार पड़ते थे तो मांओं के पास अक्सर प्रार्थना करने के अलावा कोई चारा नहीं होता था.”
शाह ने कहा कि मौजूदा वेलफेयर सिस्टम यह पक्का करता है कि फायदा बिना किसी लीकेज के सीधे पाने वालों तक पहुंचे.
Sunday को लॉन्च हुआ पीएम फैमिली केयर ट्रैकर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो मांओं और बच्चों के लिए हेल्थ, न्यूट्रिशन, एजुकेशन और सोशल वेलफेयर स्कीम की मॉनिटरिंग और डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए कई वेलफेयर डेटाबेस को जोड़ता है.
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डीकेएम/
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