
Mumbai , 18 जुलाई . Maharashtra कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दिल्ली Police द्वारा जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले जाने पर गहरी आपत्ति जताई.
सोनम वांगचुक नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर पर कई दिनों से अनशन पर थे. उनके स्वास्थ्य को लेकर विपक्षी नेताओं ने उनसे अनशन तोड़ने की अपील भी की थी. हालांकि, सोनम अनशन तोड़ने के समर्थन में नहीं थे.
Mumbai में मीडिया से बातचीत के दौरान Maharashtra कांग्रेस चीफ हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि लोकतंत्र में सत्याग्रह करने का अधिकार है और जब पेपर लीक होते हैं तो संबंधित मंत्रालय के मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. नीट पेपर लीक होने के बाद शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक तरीके से जो प्रदर्शन चल रहा था, उस पर जबरन कार्रवाई हुई है.
उन्होंने कहा कि जो कुछ भी आज जंतर-मंतर पर हुआ, यह India को तानाशाही की ओर ले जाने का एक और कदम है. मैं इस पूरी कार्रवाई की कड़ी शब्दों में निंदा करता हूं.
उन्होंने कहा कि अगर डेमोक्रेटिक तरीकों से शुरू हुए आंदोलन भी Government को मंजूर नहीं हैं, तो यह साफ है कि इस देश में जो शुरू हुआ है वह डेमोक्रेसी नहीं, बल्कि डिक्टेटरशिप है. हमारे फेल शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के बजाय, सोनम वांगचुक को प्रोटेस्ट साइट से जबरदस्ती हटाकर हॉस्पिटल में भर्ती कराना, और प्रोटेस्ट करने वालों पर Police फोर्स का इस्तेमाल करना, डेमोक्रेसी के खिलाफ है.
मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव के एक शादी वाले बयान पर सपकाल ने कहा कि बेरोजगारी, बार-बार पेपर लीक, हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताएं, महिलाओं के खिलाफ लगातार अत्याचार, और किसानों को उनकी फसलों के लिए उचित मूल्य नहीं मिलना जैसे गंभीर मुद्दे हैं. इसके बजाय, वे हर मामले में India बनाम Pakistan लाते हैं, हर चीज में विभाजनकारी मुद्दे उठाते हैं, और ओबीसी से संबंधित राजनीति को सामने लाते रहते हैं.
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि आज जिस तरह से सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. ब्रिटिश शासन के दौरान भी ऐसा नहीं हुआ था. भाजपा हमारे देश में सबसे खराब तरह की तानाशाही लेकर आई है. हालांकि, उनमें यह कहने की हिम्मत नहीं है कि देश में इमरजेंसी लागू है.
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डीकेएम/एबीएम
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