आवार कुत्तों के लिए हर जिलें एक ‘एबीसी शेल्टर’ खुलना जरूरी: मेनका गांधी

New Delhi, 19 मई . Supreme Court ने देश में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है. इस क्रम में Supreme Court ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने फैसले को बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें डॉग लवर्स की ओर से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के पूर्व आदेश में बदलाव की मांग की गई थी. वहीं, एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है.

मेनका गांधी ने से बातचीत में कहा कि Supreme Court ने हार मान ली है. उन्होंने जो नवंबर 2022 को ऑर्डर दिया था, उसमें उन्होंने ‘शेल्टर’ बनाने और ‘एबीसी शेल्टर’ बनाने के आदेश के साथ राज्यों के सचिवों को बुलाकर खास हिदायत भी दी थी. कोर्ट ने कहा था कि अगर शेल्टर नहीं बनेंगे तो कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ, कोई शेल्टर नहीं बना. इसके बाद Supreme Court ने कह दिया कि अब आप हाई कोर्ट चले जाइए.

उन्होंने कहा कि Supreme Court ने कहा था कि 780 जिले हैं तो 780 एबीसी शेल्टर नहीं बनाएं, लेकिन एक भी नहीं बना. अब एक भी नहीं बनाएंगे तो क्या होगा. दिल्ली में हमने बनाना तो दूर 10 एबीसी शेल्टर बंद कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बताया कि गंगानगर शहर में कुत्तों के काटने के 1080 मामले सामने आए हैं, लेकिन सवाल यह है कि गंगानगर में आज तक एक भी एबीसी शेल्टर क्यों नहीं खोला गया.

मेनका गांधी ने कहा कि रोजाना 10500 कुत्ते हिट एंड रन में मारे जाते हैं; ऐसे में हमें इन सवालों के जवाब भी ढूंढने होंगे. अगर Supreme Court ये बोल देता कि अगर एबीसी शेल्टर नहीं खोलोगे तो हम उस शहर के नगर आयुक्त को सस्पेंड कर देंगे, तो सारे एबीसी शेल्टर खोल दिए जाते. अगर वो केवल ये बोल देते हैं कि पूरे देश में केवल 16 एनजीओ हैं, जिनकी ट्रेनिंग हुई है, और 780 जिलों में सब नकली एनजीओ चला रहे हैं, तो ऐसा क्यों हो रहा है?

उन्होंने कहा कि पोलियो को निकालने में 15 साल लगे, उसके लिए Government ने 700 करोड़ रुपए खर्च किए हर हफ्ते…आप कुत्तों के मामलों के लेकर चलाए जा रहे पूरे प्रोग्राम में ही 700 करोड़ रुपए डाल दीजिए, फिर देखिए कितना असर पड़ता है.

उन्होंने कहा इस समस्या का समाधान कुछ इस तरह हो सकता है कि अब राज्यों को 780 एबीसी शेल्टर खोलने चाहिए और 780 एनजीओ को ट्रेनिंग दें और एक कानून ये बनाएं कि कोई एनजीओ एक से ज्यादा कॉन्ट्रेक्ट नहीं ले सकता है.

उन्होंने बताया कि चेन्नई में एक एनजीओ ने 11 कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं. वसाई वरार में एक एनजीओ ने पांच कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं. Haryana में एक-एक एनजीओ ने सात से आठ कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं और सारे गैर-कानूनी हैं. अगर आप इन गैर-कानूनी एनजीओ को निकाल दें और उनकी जगह एनजीओ को ट्रेनिंग दे दें और हिसाब से एक एनजीओ को एक कॉन्ट्रेक्ट दे दें, तो सिस्टम सुधर जाए.

एमएस/