विधायकों को एआई की समझ जरूरी, बिहार विधानसभा में प्रशिक्षण की जरूरत: सम्राट चौधरी

गया जी, 11 जुलाई . बिहार के Chief Minister सम्राट चौधरी ने Saturday को कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जवाबदेही पर निर्भर करती है. उन्होंने विधायकों से आह्वान किया कि वे विधानसभा की कार्यवाही और संसदीय प्रक्रियाओं का अधिकतम उपयोग करते हुए जन समस्याओं को प्रभावी ढंग से Government तक पहुंचाएं.

सम्राट चौधरी ने बदलते तकनीकी दौर का उल्लेख करते हुए बिहार विधानसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की आवश्यकता जताई. गया जी बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बिपार्ड) में में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को सदन के माध्यम से Government तक पहुंचाना है.

उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, कटौती प्रस्ताव और अन्य संसदीय उपकरण केवल औपचारिक प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को मजबूती देने के प्रभावी माध्यम हैं. Chief Minister ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है.

उन्होंने कहा कि करीब 20 वर्ष पहले लोग फेसबुक जैसी तकनीकों से परिचित भी नहीं थे, लेकिन आज मोबाइल, इंटरनेट और social media हर घर तक पहुंच चुके हैं. Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में देश में डिजिटल तकनीक का व्यापक विस्तार हुआ है, जिससे शासन व्यवस्था और आम लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक का प्रभाव और बढ़ेगा, इसलिए जनप्रतिनिधियों को भी इसके अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा.

सम्राट चौधरी ने कहा कि अब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही है. ऐसे में बिहार विधानसभा में भी एआई पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि विधायक नई तकनीक की उपयोगिता को समझ सकें और उसका लाभ शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में मिल सके.

Chief Minister ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब नीचे से ऊपर तक विकास की प्रक्रिया मजबूत होगी और समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचेगा. विधायक विधानसभा के प्रत्येक सत्र का पूरा उपयोग करें. उन्होंने कहा कि बिहार Government उद्योग, सुशासन और निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से विकास कार्यों को गति दी जा रही है और निवेश का अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है.

एमएनपी/