निंदनीय है लखीमपुर हिंसा पीएम नहीं करते किसी आरोपी की रक्षा: निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली (New Delhi) . केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लखीमपुर खीरी हिंसा की निंदा की है. अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर गईं सीतारमण ने मंगलवार (Tuesday) को हार्वर्ड केनेडी स्कूल में लखीमपुर खीरी में चार किसानों कीहत्या (Murder) और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी के बारे में बातचीत के दौरान एक सवाल का जवाब दे रही थीं. इस दौरान उनसे पूछा गया कि इस पर प्रधानमंत्री, वरिष्ठ मंत्रियों की ओर से कोई बयान क्यों नहीं आया है. उन्होंने कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं मुझे लगा कि आपने एक ऐसी घटना को उठाया जो बिल्कुल निंदनीय है. हम (बीजेपी) में हर कोई ऐसा सोचता है. इसी तरह के मामले और भी राज्यों में हो रहे हैं. वहां के बारे में कोई बात नहीं करता है. यह चिंता की बात है. सीतारमण ने कहा, “भारत में इस तरह के मुद्दे देश के कई अलग-अलग हिस्सों में समान रूप से हो रहे हैं. मैं चाहती हूं कि जो भारत को जानते हैं, ऐसे मामलों को केवल उस समय नहीं उठाएं जब यह भाजपा शासित राज्य में हो रहे हों.

उन्होंने कहा, मेरी पार्टी या मेरे प्रधानमंत्री किसी भी आरोपी को लेकर रक्षात्मक नहीं हैं. हम भारत के बारे में रक्षात्मक हैं. मैं भारत के लिए बात करूंगी. मैं गरीबों के लिए न्याय की बात करूंगी. आइए तथ्यों पर बात करते हैं. आपको बता दें कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा का नाम प्राथमिकी में उन आरोपों के बाद दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वह उन वाहनों में सवार था, जिसनों किसानों को कुचला. ये किसान यूपी के उपमुख्यमंत्री (Chief Minister) केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा का विरोध कर रहे थे. पंजाब, हरियाणा (Haryana) और कई अन्य राज्यों के हजारों किसान पिछले साल 26 नवंबर से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे सितंबर में बनाए गए तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. इन कानूनों को “किसान विरोधी” बताते हुए, इन किसानों का दावा है कि नए अधिनियमित कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. उन्हें बड़े निगमों की दया पर छोड़ दिया जाएगा. सीतारमण ने कहा कि प्रदर्शनकारी पंजाब, हरियाणा (Haryana) और पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कुछ हिस्सों तक सीमित हैं. उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि वह प्रदर्शनकारियों (Protesters) से बात करने को तैयार है और उनके साथ बातचीत कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि पारित किए गए तीन कानूनों में से किसी एक में ऐसा क्या पहलू है जिस पर प्रदर्शनकारियों (Protesters) ने आपत्ति जताई है. हम इसके बारे में बात करने को तैयार हैं. आज तक, हमारे पास एक भी विशेष पहलू नहीं है जिस पर सवाल उठाया जा रहा है.

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