ईशा फाउंडेशन मानहानि मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने 39 शॉर्ट वीडियो और 5 अंग्रेजी वीडियो हटाने का दिया आदेश

New Delhi, 31 जुलाई . दिल्ली हाई कोर्ट ने ईशा फाउंडेशन के पक्ष में दिए गए अपने पहले अंतरिम आदेश के दायरे को स्पष्ट करते हुए बढ़ा दिया है. कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री वाले 39 और शॉर्ट वीडियो तथा 5 अंग्रेजी भाषा के वीडियो हटाने का निर्देश दिया है.

न्यायमूर्ति सुब्रमोनियम प्रसाद की एकल पीठ ने ईशा फाउंडेशन द्वारा दायर एक आवेदन पर यह आदेश पारित किया. फाउंडेशन ने 19 मार्च के अंतरिम आदेश में स्पष्टीकरण मांगा था, जिसमें कोर्ट ने कुछ आपत्तिजनक वीडियो और लेख हटाने का आदेश दिया था.

फाउंडेशन ने कहा कि 19 मार्च का आदेश उन लिंक्स तक सीमित था जिनका जिक्र अंतरिम याचिका में था. लेकिन याचिका के पैरा 10 में सूचीबद्ध 39 शॉर्ट वीडियो और 5 अंग्रेजी वीडियो इसमें शामिल नहीं थे, जबकि उनमें भी वही मानहानिकारक सामग्री है जो पहले से प्रतिबंधित वीडियो में थी.

वहीं प्रतिवादियों ने इस आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि यह असल में एक पुनर्विचार याचिका है, जिसके जरिए पहले दिए गए अंतरिम राहत के दायरे को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि भले ही इस आवेदन को “स्पष्टीकरण” के नाम से दायर किया गया है, लेकिन यह असल में “संशोधन” के लिए है.

न्यायमूर्ति प्रसाद ने कहा कि मांगी गई राहत पहले के अंतरिम आदेश के दायरे से बाहर नहीं है, क्योंकि याचिका की सामग्री पहले ही अंतरिम याचिका में शामिल की जा चुकी है. “हालांकि यह आवेदन स्पष्टीकरण के लिए है, लेकिन यह वास्तव में संशोधन के लिए है. आवेदक यहां उन लिंक्स को शामिल कर रहा है जिनका जिक्र स्टे एप्लीकेशन में नहीं है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि 19 मार्च के आदेश में पहले ही आपत्तिजनक सामग्री को प्राथमिक दृष्टिकोण में मानहानिकारक माना जा चुका है और उसमें पैरा 25 का जिक्र था, जिसमें याचिका के पैरा 10 का संदर्भ है.

अपने पहले आदेश को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी संशोधन मानते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 मार्च के आदेश के पैरा 58 और 59 में बदलाव किया.

संशोधित निर्देशों के तहत प्रतिवादी 2 और 3 को कोई भी मानहानिकारक सामग्री बनाने, प्रकाशित करने, अपलोड करने या प्रसारित करने से रोका गया है. प्रतिवादी 1 और 3 को आपत्तिजनक वीडियो और लेखों के साथ-साथ “याचिका के पैरा नंबर 10 में बताए गए 39 शॉर्ट वीडियो और 5 अंग्रेजी भाषा के वीडियो” भी हटाने का निर्देश दिया गया है.

कोर्ट ने कहा कि यह आदेश 19 मार्च के आदेश के साथ मिलाकर पढ़ा जाए. इसके साथ ही आवेदन का निपटारा कर दिया गया. अब इस मामले की सुनवाई 5 अगस्त को रोस्टर पीठ के समक्ष होगी.

ईशा फाउंडेशन ने यह मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर सद्गुरु को निशाना बनाने वाले मानहानिकारक और भ्रामक वीडियो लगातार प्रसारित किए जा रहे हैं.

19 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए चिन्हित वीडियो हटाने और मामले के निपटारे तक ऐसी सामग्री के आगे प्रसार पर रोक लगा दी थी.

डीएससी