
वॉशिंगटन, 22 अप्रैल . अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को बढ़ाने का ऐलान किया. इस बीच पूर्व अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर एचआर मैकमास्टर ने न्यूज एजेंसी के साथ खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि जिस तरह का हालात हैं ईरान की व्यवस्था लंबे समय तक नहीं टिक पाएगी.
सवाल: आपको क्या लगता है कि यह अमेरिका और ईरान की लड़ाई अब आगे किस तरफ जाएगी?
जवाब: मुझे नहीं लगता कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान खुद को संभाल पाएगा. मुझे लगता है कि यह व्यवस्था लंबे समय तक टिक नहीं पाएगी. इसकी एक वजह यह है कि इसकी सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचा है और अपनी सीमाओं के बाहर प्रभाव दिखाने की ताकत भी कमजोर हुई है. भ्रष्टाचार के जरिए, जनता की भलाई से ज्यादा परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को प्राथमिकता देकर, इन योजनाओं पर भारी धन खर्च करके और Government या उससे जुड़े समूहों द्वारा धन को बाहर भेजने जैसी गतिविधियों के कारण इसने अपने ही लोगों को नुकसान पहुंचाया है. उदाहरण के लिए नए सुप्रीम लीडर के पास ऑफशोर अकाउंट्स में करोड़ों डॉलर हैं तो मुझे लगता है कि Government का भ्रष्टाचार और खासकर मैं कहूंगा कि हाल ही में हमने उनके साथ जो क्रूरता देखी है न सिर्फ Political कैदियों को फांसी देने में जो वे करते रहते हैं, बल्कि जनवरी में 48 घंटे में 40,000 लोगों की हत्या हुई. भू-Political दांव भले ही बहुत बड़े हों, लेकिन सबसे ज्यादा असर ईरान के आम लोगों पर पड़ता है. इसलिए ध्यान उनकी स्थिति पर होना चाहिए. साथ ही धार्मिक तानाशाही के दमनकारी साधनों चाहे वे आर्थिक हों या सैन्य, को कमजोर करने के लिए ठोस और लगातार कदम उठाते रहना जरूरी है.
सवाल: यूएस-चीन और यूएस-Pakistan संबंधों में सुधार को देखते हुए आपको क्या लगता है कि इसका भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब: अमेरिका-India संबंधों की दिशा काफी सकारात्मक मानी जाती है. भू-Political नजरिए से देखें तो यूरेशियन क्षेत्र में चीन और रूस दो बड़ी ताकतें हैं और यही वजह है कि India कई मामलों में रूस के साथ संतुलन बनाए रखता है, क्योंकि ये दोनों शक्तियां उसके आसपास के क्षेत्र में मौजूद हैं. इसके साथ ही, चीन और रूस का प्रभाव उन देशों तक भी फैला हुआ है जहां केंद्रीकृत या सख्त शासन व्यवस्था है, जैसे उत्तर कोरिया और ईरान और पहले वेनेजुएला में भी ऐसा प्रभाव देखा गया था. इस परिप्रेक्ष्य में इसे खुले और लोकतांत्रिक समाजों, जैसे India और अमेरिका, जो दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक ताकतें हैं और उनके मुक्त बाजार आधारित आर्थिक मॉडल के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जाता है. India और अमेरिका नेचुरल पार्टनर हैं. मुझे इस संबंध पर बहुत भरोसा है क्योंकि अमेरिका में हमें बहुत टैलेंटेड और वाइब्रेंट भारतीय समुदाय से फायदा हुआ है. अमेरिका में हमारे कुछ सबसे क्रिएटिव उद्यमी भारतीय अमेरिकी नागरिक हैं. इसलिए मुझे लगता है कि उस पीढ़ी और नई पीढ़ियों के बीच, हमारे सबसे मजबूत सांस्कृतिक संबंध और असल में पारिवारिक संबंध भी हैं जो हमारे संबंध की बुनियाद हैं.
सवाल: India और अमेरिका अपने रक्षा सहयोग को कैसे बेहतर बना सकते हैं?
जवाब: एक छोटी रुकावट है और वह छोटी रुकावट है भारतीय सेना का रूसी सेना के साथ संबंध और इसलिए सुरक्षा की चिंताओं की वजह से सबसे काबिल अमेरिकी हथियार, सबसे काबिल अमेरिकी गोला-बारूद बेचने में बहुत हिचकिचाहट है, क्योंकि कॉम्प्रोमाइज का खतरा है. हमें किसी तरह इससे उबरना होगा. ऐसा करने का एक तरीका यह होगा कि India धीरे-धीरे रूसी हथियारों और गोला-बारूद पर अपनी निर्भरता कम करे. बेशक वे उपस्थित नहीं हैं क्योंकि उनके पास यूक्रेनी लोगों के खिलाफ अपने हमले को बनाए रखने की औद्योगिक क्षमता नहीं है लेकिन यह भी काम नहीं करता. उनके एयर डिफेंस सिस्टम को हराना आसान है. और इसलिए मुझे लगता है कि India के लिए यह जरूरी है कि वह धीरे-धीरे या जितनी जल्दी हो सके, रूसी वेपन सिस्टम पर निर्भरता कम करे. आप ऐसा किसी तीसरे देश के वेपन सिस्टम से कर सकते हैं, जैसे यूरोपीय सिस्टम खरीदकर वगैरह. लेकिन हां, मुझे लगता है कि अमेरिकी उपकरण ही, India को जिन चीजों की चिंता है, उन्हें हराने में सबसे ज्यादा काबिल है, वो हैं चीनी वेपन सिस्टम. चीनी रडार सिस्टम, चीनी फाइटर एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वॉरफेयर जैसी दूसरी तकनीक वगैरह जो चीन Pakistan को दे रहा है.
सवाल: President ट्रंप की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर आपके क्या विचार हैं, क्योंकि आपने उनके साथ पहले भी काम किया है?
जवाब: मुझे भरोसा है कि समय के साथ हमारे संबंध और मजबूत होंगे, अलायंस और पार्टनरशिप और मजबूत होंगी. जिस बात से मैं निराश हुआ, वह थी ज्यादातर बयानबाजी, कभी-कभी गैर-गंभीर तो कभी-कभी दिखावटी और आपत्तिजनक पब्लिक डिप्लोमेसी और कम्युनिकेशन, मेरे हिसाब से यह खुद को हराने वाला है. इसलिए लंबे समय में मुझे लगता है कि हमारे पास मजबूत अलायंस हो सकते थे क्योंकि President ट्रंप, उदाहरण के लिए यूरोपीय देशों को अपने डिफेंस में ज्यादा निवेश करने के लिए मनाने में सफल रहे हैं. अब हमें जो करना है, वह है भरोसे की उस कमी को पूरा करना जो हमारे यूरोपीय दोस्तों, हमारे भारतीय दोस्तों को कुछ ऐसी भाषा की वजह से बुरा लगा है.
बेशक, लोगों को यह याद दिलाना जरूरी है कि अमेरिका कोई राजशाही नहीं है. हमने 250 साल पहले अपनी लड़ाई लड़ी थी, इस क्रान्तिकारी विचार के आधार पर कि संप्रभु लोगों के पास है, राजा के पास नहीं, पार्लियामेंट के पास भी नहीं. इसलिए जैसा कि आपके सुनने वाले और देखने वाले जानते होंगे, हम एक फेडरल सिस्टम हैं और यूएस कांग्रेस में, पूरे अमेरिका में India के लिए बहुत ज्यादा लगाव है
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