ईरान ने मातम को राजनीतिक कार्यक्रम में बदला : दीपक वोहरा

New Delhi, 4 जुलाई . ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया. अली खामेनेई को आखिरी विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में भीड़ इकट्ठा हो रही है. इस बीच अमेरिका के खिलाफ नारे भी लगाए जा रहे हैं. के साथ खास बातचीत के दौरान India के पूर्व राजदूत दीपक वोहरा ने कहा कि ईरान ने मातम के माहौल को Political कार्यक्रम में बदल दिया.

उन्होंने लेबनान और इजरायल के बीच समझौते और हालात को लेकर कहा, “दोनों के बीच जून के महीने में चार बार समझौते हुए हैं. इजरायल कहता है कि लेबनान पर पूरी तरह से हिज्बुल्लाह का नियंत्रण है. लेबनान और इजरायल के बीच 1982 के आसपास युद्ध हुआ था और दो हजार ईरानी इस्लामिक गार्ड के अधिकारी लड़ने आए थे. उन्होंने मिलकर हिज्बुल्लाह की स्थापना की थी. इनका कहना है कि ईरान मेरा भगवान है, इससे पूछे बिना कुछ नहीं होगा. ये लोग 1985 से दशकों से इजरायल को तंग कर रहे हैं और अब इजरायल कार्रवाई कर रहा है. अब इजरायल रूकेगा नहीं, जब तक हिज्बुल्लाह बिल्कुल खत्म न हो जाए.”

उन्होंने बताया, “4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे हो रहे हैं. अमेरिका के लोग जश्न मना रहे हैं और ईरान में मातम मनाया जा रहा है. अली खामेनेई के जनाजे के लिए ईरान ने इसी दिन को चुना है. यह अमेरिका को ललकार रहा है. इसलिए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को जनाजे के लिए एक हफ्ते का समय दे रहा हूं और उसके बाद मैं वही करूंगा, जो हमें करना चाहिए. यह बहुत अहम है.”

दीपक वोहरा ने कहा, “किसी ने कहा कि जनाजे में 25 करोड़ की आबादी आ गई है. मेरा कहना है कि जिस देश की आबादी ही नौ करोड़ है, वहां इतने लोग कहां से आ गए. ईरानी टीवी और मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सारी दुनिया के नेता वहां पहुंचे हैं. एक डिप्लोमैट के तौर पर मेरे लिए अहम बात यह है कि अब तक एक नेता गया है, वो है Pakistanी Prime Minister शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी चीफ असीम मुनीर और कोई नहीं गया. चीन ने अपने जूनियर प्रतिनिधि को भेजा, खाड़ी के देशों ने अपने नीचे के पद के अधिकारियों को भेजा, India ने एक गवर्नर साहब को भेजा, जो बहुत ऊंचे पद पर होते हैं. अब तक और कोई नहीं गया.”

उन्होंने कहा, “यूरोप से कोई नहीं गया है. ये हमारे लिए कूटनीति में बहुत जरूरी होता है. सारी दुनिया के लोग नहीं आए हैं, आप अपने लोगों को खुश करने के लिए यह कहिए. आपके नेता अली खामेनेई को मार दिया गया था, इसके लिए हमारी सहानुभूति आपके साथ है. खामेनेई दो बार दिल्ली आए, एक बार जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी का निधन हुआ और फिर राजीव गांधी का. इंदिरा गांधी के निधन के समय वो President थे, उसके बाद वो सुप्रीम लीडर थे. राजीव गांधी के निधन के बाद दिल्ली से फिर वो कश्मीर भी गए थे. वहां उन्होंने बहुत कुछ कहा था. ये चीजें हम लोग भूलते नहीं हैं. मेरा कहना है कि ईरान बिल्कुल अकेला पड़ गया है. हमारे लोग भी गए हैं, मैं भी सहानुभूति रखता हूं. हमें दुख है कि आपका सुप्रीम नेता मारा गया. लेकिन, वहां पर नारे लगा रहे हैं कि अमेरिका मुर्दाबाद, हम बदला लेंगे, ये ऐसे नारे लगाने का मौका नहीं है. आपने जनाजे को Political कार्यक्रम बना दिया.”

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